श्यामनगर गांव की अनोखी देशभक्ति का सबसे खास पहलू यह है कि इसमें किसी एक जगह के लोगों की भागीदारी नहीं है। खेत में काम करने वाले किसान हों, सड़क से गुजर रहे लोग हों या फिर अपनी दुकान पर बैठे व्यापारी, राष्ट्रगान शुरू होते ही लोग अपनी जगह पर सावधान की मुद्रा में खड़े होने का प्रयास करते हैं।करीब 52 सेकंड के इस राष्ट्रगान के दौरान पूरा गांव एक साथ दिखाई देता है। इसके पीछे किसी सरकारी आदेश के बजाय ग्रामीणों की अपनी पहल और राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना बताई जाती है।
2018 से लगातार निभाई जा रही परंपरा
श्यामनगर गांव की अनोखी देशभक्ति से जुड़ी यह पहल 26 जनवरी 2018 से शुरू की गई थी। इसके लिए ग्राम पंचायत के साथ व्यापारी संघ, ग्राम विकास समिति और जरई श्यामसुंदर समिति सहित स्थानीय लोगों के सहयोग से राशि जुटाई गई।इसी सहयोग से गांव में लाउडस्पीकर की व्यवस्था की गई और रोजाना सुबह राष्ट्रगान प्रसारित करने की शुरुआत हुई। समय बीतने के साथ यह पहल गांव की पहचान का हिस्सा बन गई।
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देशभक्ति के साथ गांव में स्वच्छता पर भी जोर
श्यामनगर गांव की अनोखी देशभक्ति केवल रोजाना राष्ट्रगान तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने गांव के विकास और पर्यावरण को लेकर भी कई काम मिलकर किए हैं।गांव में पौधरोपण और पौधों की देखभाल के साथ स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। सार्वजनिक शौचालय और पानी की टंकी जैसे कामों में भी ग्रामीणों ने सहयोग दिया है। शासकीय स्कूल में जमीन को समतल कर चबूतरा बनाने का काम भी सामूहिक प्रयास से किए जाने की बात सामने आती है।इन कामों में ग्रामीणों की भागीदारी बताती है कि उनके लिए गांव की जिम्मेदारी केवल पंचायत या प्रशासन तक सीमित नहीं है।
चंदे से पूरे किए कई जरूरी काम
श्यामनगर गांव की अनोखी देशभक्ति के पीछे ग्रामीणों की सामूहिक सोच नजर आती है। गांव के लोग अपनी जरूरत के कई कामों के लिए आपसी सहयोग से राशि जुटाते रहे हैं। इससे सार्वजनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण और स्वच्छता से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिली।ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों और युवाओं में भी देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो सकती है।
दूसरे गांवों के लिए भी बन सकती है मिसाल
श्यामनगर गांव की अनोखी देशभक्ति इस बात की मिसाल है कि किसी अच्छी पहल के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। अगर स्थानीय लोग मिलकर जिम्मेदारी उठाएं तो छोटी शुरुआत भी पूरे गांव की पहचान बन सकती है।जहां राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रगान के दौरान खड़ा होना आम बात है, वहीं श्यामनगर में इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया गया है। खेत, दुकान और सड़क से लेकर गांव के अलग-अलग हिस्सों में लोग इसके साथ जुड़ते हैं।श्यामनगर की यह पहल केवल राष्ट्रगान तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि सामूहिक सहयोग, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और गांव के विकास की सोच से भी जुड़ी है। यही वजह है कि राजिम का यह गांव ग्रामीण एकजुटता और देश के प्रति सम्मान की एक अलग कहानी पेश करता है।