E20 Ethanol Blended Petrol Controversy: E20 ईंधन नीति में पारदर्शिता की कमी, सरकार सार्वजनिक करे सभी दस्तावेज: तहसीन पूनावाला

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E20 Ethanol Blended Petrol Controversy: नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला और उनकी संस्था ‘टीम भारत’ ने केंद्र सरकार की E20 ईंधन नीति (20% इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल) के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है। ETV Bharat से खास बातचीत करते हुए पूनावाला ने आरोप लगाया कि इस नीति में पारदर्शिता की भारी कमी है और इथेनॉल मिश्रण के बाद भी आम जनता को सस्ता पेट्रोल मिलने के बजाय महंगाई का नया बोझ झेलना पड़ रहा है।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि E20 नीति से जुड़े तमाम प्रशासनिक और तकनीकी दस्तावेजों को तुरंत सार्वजनिक किया जाए।

आम जनता व वाहन मालिकों के लिए प्रमुख मांगें

देश के करोड़ों वाहन मालिकों के हितों की वकालत करते हुए तहसीन पूनावाला ने सरकार के समक्ष चार मुख्य मांगें रखी हैं:

  1. E10 पेट्रोल की निरंतर उपलब्धता: देश में चल रही लगभग 80 से 90 प्रतिशत गाड़ियां E10 (10% इथेनॉल) के अनुकूल हैं। अतः हर पेट्रोल पंप पर E10 ईंधन की बिक्री अनिवार्य रूप से जारी रखी जाए।

  2. शुद्ध पेट्रोल (E0) के दाम घटें: बिना मिलावट वाले शुद्ध पेट्रोल (E0) की मौजूदा कीमत बाजार में ₹165 से ₹170 प्रति लीटर तक है। इसे घटाकर तुरंत ₹90 प्रति लीटर किया जाए।

  3. E20 ईंधन पर 20% की छूट: यदि सरकार E20 के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहती है, तो इसे शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले 20 प्रतिशत सस्ता बेचा जाना चाहिए।

  4. 2023 से पुरानी गाड़ियों के लिए मुआवजा: साल 2023 से पहले बनी गाड़ियों के इंजन को E20 पेट्रोल से नुकसान पहुंचने की आशंका है। सरकार को ऐसे वाहन मालिकों के लिए ठोस आर्थिक मुआवजा या समाधान योजना लानी चाहिए।E20 विरोध: टीम भारत 31 जुलाई को सड़क रैली "गाड़ी मार्च, गांधी मार्च" आयोजित  करेगी - ChiniMandi

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर साधा निशाना

पूनावाला ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर सीधा हमला बोलते हुए हितों के टकराव (Conflict of Interest) का आरोप लगाया। उन्होंने कहा:

“परिवहन मंत्री को इथेनॉल के मामले में दखल देना बंद करना चाहिए। उन्होंने पूर्व में जनता को ₹15 प्रति लीटर पेट्रोल मिलने का दावा कर गुमराह किया था, जो पूरी तरह असत्य साबित हुआ। जनता को गुमराह करने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

संसद में दिए बयानों पर सरकार को घेरा

संसद के हालिया सत्र का हवाला देते हुए पूनावाला ने कहा कि सरकार के बयानों से ही उनकी बात सच साबित हुई है। सरकार ने माना है कि E20 नीति लागू करने से पहले देश में इसके अनुकूल चलने वाले वाहनों का कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं था।

उन्होंने कार कंपनियों द्वारा दिए गए पिछले दो वर्षों के सेफ्टी डेटा को खारिज करते हुए कहा कि E20 नीति को हाल ही में अनिवार्य किया गया है, इसलिए पुराना डेटा अप्रासंगिक है।

सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होने की अपील

पूनावाला ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर देश के मध्यवर्ग और आम नागरिकों की जेब से जुड़ा विषय है। उन्होंने विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों और विधायकों से भी अपील की है कि वे अपनी ही सरकार के सामने इस जनहित के मुद्दे को उठाएं।

‘टीम भारत’ की कोर कमेटी की आगामी बैठक में इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन की आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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