MP News: संजय गांधी अस्पताल कर्मचारियों की हड़ताल ने रीवा के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संजय गांधी अस्पताल के आउटसोर्स कर्मचारियों ने सोमवार से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर काम बंद कर दिया। प्रदर्शन में सफाई कर्मचारी, वार्ड बॉय और सुरक्षा गार्ड शामिल हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
मेडिकल कॉलेज के बाहर किया प्रदर्शन
संजय गांधी अस्पताल कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी श्यामशाह मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार के सामने एकत्र हुए। उन्होंने नारेबाजी करते हुए लंबित वेतन जल्द जारी करने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों और आउटसोर्स कंपनी को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी वजह से उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
दो महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप
MP News: संजय गांधी अस्पताल कर्मचारियों की हड़ताल का मुख्य कारण कर्मचारियों के अनुसार दो महीने से वेतन का भुगतान नहीं होना है। उनका कहना है कि नियमित आय बंद होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
कई कर्मचारी किराए के मकानों में रहते हैं। समय पर किराया नहीं दे पाने के कारण मकान मालिकों का दबाव बढ़ रहा है। वहीं बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गई हैं।
अस्पताल प्रबंधन और कंपनी पर लगाए आरोप
MP News: प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित आउटसोर्स एजेंसी पर समय पर वेतन जारी नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि भुगतान समय पर होता तो उन्हें हड़ताल करने की नौबत नहीं आती।हालांकि, इस मामले में अस्पताल प्रबंधन या संबंधित आउटसोर्स कंपनी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सेवाओं पर असर की आशंका
MP News: संजय गांधी अस्पताल कर्मचारियों की हड़ताल के चलते अस्पताल की सफाई, वार्ड संचालन और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। कर्मचारियों ने साफ कहा है कि यदि जल्द ही दो महीने का बकाया वेतन जारी नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
अब सभी की नजर अस्पताल प्रबंधन और संबंधित एजेंसी के अगले कदम पर है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर मरीजों और अस्पताल की दैनिक सेवाओं पर भी पड़ सकता है।




