MP Health News: सर्पदंश और डॉग बाइट की जीवनरक्षक दवाओं का संकट, रीवा मेडिकल कॉलेज से दूसरे अस्पतालों को भेजी जा रही मदद

Anuj Nirala

MP Health News: रीवा। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इन दिनों सर्पदंश और डॉग बाइट के इलाज में उपयोग होने वाली जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति प्रभावित होने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि एंटी स्नेक वेनम (Anti Snake Venom) वायल और एंटी रैबीज इंजेक्शन की नियमित सप्लाई नहीं होने से कई मेडिकल कॉलेजों में परेशानी की स्थिति बन रही है।

जानकारी के अनुसार, एंटी स्नेक वेनम का उपयोग सर्पदंश के गंभीर मरीजों के इलाज में किया जाता है। इसकी सबसे अधिक खपत अस्पतालों की अति गंभीर चिकित्सा इकाई (ICU) और प्रिवेंटिव/इंटेंसिव केयर यूनिट में होती है। वहीं एंटी रैबीज इंजेक्शन का उपयोग कुत्ते एवं अन्य संदिग्ध रेबीज संक्रमित जानवरों के काटने वाले मरीजों के उपचार में किया जाता है। रीवा के सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में डॉग बाइट के मरीज पहुंचने के कारण इसकी खपत भी काफी अधिक रहती है।

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MP Health News: बताया जा रहा है कि प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में इन दोनों जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति बराबर नहीं हो पा रही है। इसी के चलते कई संस्थानों में दवाओं की कमी महसूस की जा रही है।

सतना मेडिकल कॉलेज में एंटी स्नेक वेनम का स्टॉक लगभग समाप्त हो गया था, जिसके बाद रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से 300 वायल उपलब्ध कराए गए ताकि मरीजों का उपचार प्रभावित न हो।

MP Health News: विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने से एंटी स्नेक वेनम की मांग कई गुना बढ़ जाती है। रीवा स्थित श्याम शाह मेडिकल कॉलेज एवं संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में हर वर्ष लगभग 2 हजार से अधिक एंटी स्नेक वेनम वायल की खपत होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यहां अपेक्षाकृत पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने का प्रयास किया जाता है, ताकि रीवा सहित आसपास के जिलों के मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

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हालांकि, यदि प्रदेश स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में अन्य मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ बड़े अस्पतालों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने इन जीवनरक्षक दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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