MP News : सिंगरौली में 18 करोड़ का ‘कचरा घोटाला’ उजागर! स्वच्छता के नाम पर जनता को मिली गंदगी और भ्रष्टाचार

VIKASH KHALKHO

सिंगरौली। मध्य प्रदेश की ऊर्जा नगरी सिंगरौली में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के नाम पर एक और बड़ा 18 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। नगर पालिक निगम सिंगरौली द्वारा हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर का हाल बेहाल है। सड़कों के किनारे कूड़े के ढेर, नालों में बहता गंदा पानी और नाकाम सफाई व्यवस्था निगम के “स्वच्छ सिंगरौली” के दावों की पोल खोल रही है।

सिटाडेल कंपनी पर गंभीर आरोप:

नगर निगम सिंगरौली ने वर्ष 2018 में सिटाडेल ISWM प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को शहर के 45 वार्डों में कचरा संकलन और निस्तारण का जिम्मा सौंपा था। इस अनुबंध के तहत कंपनी को प्रति माह करीब 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है।

पांच साल में नहीं सुधरी व्यवस्था: स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कंपनी द्वारा एकत्रित कचरा गनियारी स्थित प्रसंस्करण केंद्र में ले जाने के बजाय रेलवे क्रॉसिंग और नदियों के किनारे खुले में डंप किया जा रहा है। इससे दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

लोगों का जीवन बना नर्क:

कचरा और गंदे पानी से उत्पन्न प्रदूषण का असर अब आम जनता के स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। कई बस्तियों में त्वचा रोग, उल्टी, बुखार, सांस संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। विशेषज्ञों ने चेताया है कि कचरे से निकलने वाला गंदा पानी काचन नदी और तालाबों में मिल रहा है, जिससे शहर की नल-जल योजना के जल स्रोत भी दूषित हो सकते हैं।

‘एक काम, दो भुगतान’ – डबल बिलिंग का खेल:

जांच में सामने आया है कि वार्ड क्रमांक 34 और 35 पहले से ही NTPC परियोजना क्षेत्र में आते हैं, जहां सफाई की जिम्मेदारी स्वयं NTPC की है। इसके बावजूद, नगर निगम ने इन्हीं वार्डों में सफाई का ठेका सिटाडेल कंपनी को दिया। सबसे गंभीर बात यह है कि कंपनी को NTPC से भी भुगतान मिल रहा है और नगर निगम से भी — यानी एक ही काम के लिए दो बार भुगतान! यह खुलासा निगम अधिकारियों और ठेकेदारों की गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

बिना अनुभव के मिला 20 साल का ठेका:

जानकारी के मुताबिक, सिटाडेल कंपनी वर्ष 2018 में रजिस्टर्ड हुई थी, यानी उस समय वह एक नवोदित और अनुभवहीन कंपनी थी। बावजूद इसके, नगर निगम ने उसे 20 वर्षों के लिए ठेका दे दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय नियमों का उल्लंघन और भ्रष्टाचार की बू देता है।

निगम उपायुक्त ने दी कार्रवाई की चेतावनी:

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि फर्जी बिलिंग की जा रही है, जहां कागजों में वाहनों से कचरा उठाने का रिकॉर्ड दिखाया जाता है, वहीं मैदान में वाहन महीनों तक खड़े रहते हैं। इस बीच, नगर निगम उपायुक्त रूपाली द्विवेदी ने कहा कि “सिटाडेल कंपनी के खिलाफ कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। यदि लापरवाही और फर्जीवाड़ा साबित हुआ तो अनुबंध निरस्त कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

हालांकि, शहरवासियों का कहना है कि इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच और सीबीआई या लोकायुक्त जांच की जरूरत है ताकि दोषियों को सजा मिले और जनता के पैसे का हिसाब हो।

मुख्य तथ्य संक्षेप में:

विवरण जानकारी
वार्षिक खर्च ₹18 करोड़
ठेका कंपनी सिटाडेल ISWM प्रा. लि.
अनुबंध अवधि 20 वर्ष (2018 से)
भुगतान ₹1.5 करोड़ प्रतिमाह
गंभीर आरोप फर्जी बिलिंग, डबल पेमेंट (वार्ड 34, 35 में), पर्यावरण प्रदूषण, बिना अनुभव के ठेका
जनता पर प्रभाव जनस्वास्थ्य संकट, जलस्रोत प्रदूषण, गंदगी का अंबार

 

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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