Katni Education News: कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले से शिक्षा के प्रति समर्पण और संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जहां एक ओर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की स्कूल से दूरी चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर रीठी विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैंगवा के शिक्षकों ने यह साबित कर दिया कि एक सच्चे शिक्षक का दायित्व केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। विद्यार्थियों की कम उपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए शिक्षकों ने करीब 16 किलोमीटर का कठिन सफर तय किया और खेतों में धान रोपाई कर रहे बच्चों तथा उनके अभिभावकों से मुलाकात कर उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया।यह पहल अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है और शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षकों की मिसाल पेश कर रही है।
स्कूल में कम उपस्थिति बनी चिंता का कारण
Katni Education News: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बाद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैंगवा में विद्यार्थियों की उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम थी। लगातार कम संख्या में बच्चों के स्कूल पहुंचने से विद्यालय प्रबंधन चिंतित था। इसी बीच जिला कलेक्टर आशीष तिवारी ने भी स्कूलों में नामांकन और नियमित उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए थे।निर्देश मिलने के बाद विद्यालय के शिक्षकों ने केवल उपस्थिति दर्ज करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि यह जानने का निर्णय लिया कि आखिर बच्चे स्कूल क्यों नहीं आ रहे हैं।
गांव पहुंचे तो घर मिले खाली, खेतों में मिले बच्चे
विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य विपिन तिवारी और अतिथि शिक्षकों की टीम जब विद्यार्थियों के गांव पहुंची तो अधिकांश घरों में ताले लगे मिले। ग्रामीणों से जानकारी मिली कि बारिश के मौसम में धान रोपाई का कार्य चल रहा है और परिवार के सभी सदस्य खेतों में काम कर रहे हैं। कई बच्चे भी अपने माता-पिता के साथ खेतों में मजदूरी और खेती के काम में जुटे हुए थे।यह जानकारी मिलते ही शिक्षकों ने वापस लौटने के बजाय खेतों तक पहुंचने का फैसला किया।
16 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर खेतों तक पहुंचे शिक्षक
शिक्षकों ने कच्चे रास्तों, उबड़-खाबड़ पगडंडियों और खेतों के बीच से गुजरते हुए करीब 16 किलोमीटर का लंबा और कठिन सफर तय किया। आखिरकार वे उन खेतों तक पहुंचे, जहां उनके विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ धान की रोपाई कर रहे थे।किताबों और कॉपियों की जगह बच्चों के हाथों में धान के पौधे देखकर शिक्षक भावुक हो गए। इसके बाद उन्होंने बच्चों और उनके माता-पिता से आत्मीयता के साथ संवाद शुरू किया।
‘आज खेत नहीं, स्कूल ज्यादा जरूरी’
शिक्षकों ने अभिभावकों को समझाया कि खेती परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन जरूर है, लेकिन बच्चों की शिक्षा उनके पूरे जीवन का भविष्य तय करती है।उन्होंने कहा कि यदि बच्चे नियमित रूप से विद्यालय आएंगे और पढ़ाई करेंगे, तो भविष्य में वे बेहतर रोजगार प्राप्त कर अपने परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदल सकते हैं। कुछ दिनों की मजदूरी से मिलने वाली आय से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बच्चों की शिक्षा और उनका उज्ज्वल भविष्य है।शिक्षकों ने बच्चों से भी आग्रह किया कि वे नियमित रूप से स्कूल आएं और अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता दें।
अभिभावकों ने दिया बच्चों को नियमित स्कूल भेजने का भरोसा
शिक्षकों की संवेदनशील पहल और समझाइश का ग्रामीणों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। अभिभावकों ने आश्वासन दिया कि अब वे बच्चों को खेतों में काम के लिए साथ नहीं ले जाएंगे और नियमित रूप से विद्यालय भेजेंगे।शिक्षकों ने भी परिवारों को भरोसा दिलाया कि विद्यालय बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हर संभव सहयोग करेगा।
शिक्षा के प्रति समर्पण की बनी मिसाल
Katni Education News: रीठी विकासखंड के नैंगवा विद्यालय के शिक्षकों की यह पहल केवल बच्चों को स्कूल लाने का प्रयास नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति उनके समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है। यह संदेश देती है कि जब शिक्षक अपने पेशे को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज निर्माण का मिशन मानते हैं, तब वे विद्यार्थियों तक पहुंचने के लिए किसी भी कठिनाई की परवाह नहीं करते।
आज यह पहल पूरे जिले में प्रेरणा का विषय बनी हुई है और यह साबित करती है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य हर बच्चे तक ज्ञान की रोशनी पहुंचाना है, चाहे उसके लिए खेतों, जंगलों या दूरस्थ बस्तियों तक ही क्यों न जाना पड़े।







