Morena Road Issue: मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के पोरसा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बडापुरा उसैथ में विकास के दावों की हकीकत बारिश के साथ सामने आ गई है। गांव की करीब 300 मीटर लंबी सड़क बरसात में पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गई है। हालत यह है कि स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और ग्रामीणों को रोजाना जान जोखिम में डालकर इसी रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। लगातार फिसलन और जलभराव के कारण दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।
स्कूल जाने के लिए कीचड़ से गुजरने को मजबूर मासूम
ग्रामीणों के अनुसार, शासकीय विद्यालय से कपूर सिंह तोमर के घर तक तथा विद्यालय से खाद्यान्न वितरण गोदाम होते हुए रामपाल सिंह तोमर के घर तक जाने वाला मार्ग बारिश के दौरान पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। सड़क पर पानी और कीचड़ भर जाने से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को हो रही है। रोजाना उन्हें कीचड़ और दलदल से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। कई बार बच्चे और राहगीर फिसलकर गिर चुके हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप- केवल आश्वासन, नहीं हुआ कोई विकास कार्य
Morena Road Issue: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत की सरपंच की ओर से लंबे समय से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस विकास कार्य नहीं हुआ। उनका कहना है कि सीसी सड़क, नाला निर्माण, पुलिया और नल-जल योजना जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं, जिससे गांव के लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जर्जर अस्पताल और पशु चिकित्सालय से भी बढ़ी चिंता
सड़क की बदहाली के साथ-साथ गांव का शासकीय आयुष औषधालय और शासकीय पशु चिकित्सालय भी जर्जर हालत में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन भवनों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और यदि समय रहते इनका पुनर्निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि इन संस्थानों में डॉक्टर, कंपाउंडर और अन्य कर्मचारी नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
प्रशासन से लगाई जल्द कार्रवाई की गुहार
Morena Road Issue: ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि गांव की सीसी सड़क, पुलिया, नाला निर्माण और अन्य अधूरे विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए। साथ ही बरसात के दौरान आवागमन सुचारु रखने के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को राहत मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो बरसात के दौरान हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं। उनका कहना है कि विकास के दावों के बीच गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।







