Khargone Road Issue: खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से विकास के दावों की हकीकत बयां करती एक तस्वीर सामने आई है। जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुम्हारखेड़ा से कुकडोल तक लगभग 3 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले करीब 25 वर्षों से निर्माण की बाट जोह रही है। सड़क की हालत इतनी खराब है कि बरसात के मौसम में यह पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाती है। इसका सबसे अधिक खामियाजा स्कूली छात्र-छात्राओं, किसानों और ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है।
हर दिन शिक्षा की राह पर निकलने वाले बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती किताबें नहीं, बल्कि कीचड़ से भरा रास्ता बन गया है। विकासखंड गोगावां स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल कुकडोल में पढ़ने के लिए कुम्हारखेड़ा गांव से रोजाना 35 से अधिक विद्यार्थी इसी रास्ते से गुजरते हैं। लेकिन सड़क की बदहाल स्थिति के कारण उन्हें हर दिन जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।
Khargone Road Issue: बरसात शुरू होते ही सड़क बड़े-बड़े गड्ढों, कीचड़ और बारिश के पानी से भर जाती है। ऐसे में विद्यार्थियों को कई जगह पैदल चलना पड़ता है। कई बार रास्ते में फिसलने का खतरा बना रहता है, जबकि साइकिल और दोपहिया वाहन चलाना लगभग असंभव हो जाता है। मजबूरी में बच्चे हाथ में जूते-चप्पल लेकर कीचड़ से गुजरते हैं और स्कूल पहुंचते-पहुंचते उनके कपड़े भी गंदे हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क के निर्माण की मांग कोई नई नहीं है। पिछले 25 वर्षों से कुम्हारखेड़ा, भसनेर और कुकडोल के ग्रामीण लगातार जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाते रहे हैं। सैकड़ों बार आवेदन दिए गए, ज्ञापन सौंपे गए और जनसुनवाई में भी इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन आज तक सड़क निर्माण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
Khargone Road Issue: ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि सड़क निर्माण का वादा जरूर करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही यह मुद्दा फिर फाइलों में दबकर रह जाता है। हर साल बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति और भी भयावह हो जाती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान की बजाय केवल अस्थायी मरम्मत कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है।
कक्षा 11वीं की छात्राएं राजनंदिनी और खुशी बताती हैं कि खराब सड़क के कारण उन्हें रोज स्कूल पहुंचने के लिए लगभग एक घंटा पहले घर से निकलना पड़ता है। कीचड़ से भरे रास्ते में पैदल चलना बेहद मुश्किल होता है। कई बार फिसलने का डर बना रहता है और स्कूल पहुंचने तक यूनिफॉर्म भी खराब हो जाती है। उनका कहना है कि सरकार ने विद्यार्थियों को निशुल्क साइकिल तो दी है, लेकिन इस सड़क पर साइकिल चलाना संभव ही नहीं है। इसलिए अधिकांश बच्चे पैदल स्कूल जाने को मजबूर हैं।
Khargone Road Issue: केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि इस मार्ग से जुड़े किसान भी भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कुकडोल और आसपास के गांवों के अधिकांश किसानों के खेत इसी सड़क के किनारे स्थित हैं। सड़क खराब होने के कारण खेती के लिए खाद, बीज और अन्य सामग्री खेत तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। वहीं फसल तैयार होने के बाद कृषि उपज को बाजार तक ले जाने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दौरान कई बार वाहन बीच रास्ते में फंस जाते हैं, जिससे किसानों का समय और आर्थिक नुकसान दोनों होता है।
ग्रामीणों के अनुसार कुम्हारखेड़ा और कुकडोल ग्राम पंचायत के सरपंच आपसी सहयोग से समय-समय पर सड़क के गड्ढों में मुरूम और पत्थर डलवाकर लोगों को राहत देने का प्रयास करते हैं। लेकिन यह राहत कुछ दिनों की ही साबित होती है। बारिश की पहली ही तेज बारिश के बाद सड़क फिर पहले जैसी बदहाल हो जाती है।
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Khargone Road Issue: ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं होती, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। यदि यह सड़क बन जाती है तो हजारों ग्रामीणों, किसानों और विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके बावजूद वर्षों से यह मांग पूरी नहीं हो सकी है।
अब एक बार फिर ग्रामीणों, विद्यार्थियों और किसानों ने सरकार और प्रशासन से इस सड़क का जल्द निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास के दावे तभी सार्थक होंगे, जब गांव के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए कीचड़ से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा और किसानों को अपनी फसल बाजार तक पहुंचाने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। 25 वर्षों से अधूरी पड़ी यह सड़क आज भी विकास की राह देख रही है और गांव के लोगों को उम्मीद है कि इस बार उनकी आवाज जिम्मेदारों तक जरूर पहुंचेगी।







