Chhattisgarh Electricity Bill: रायपुर। छत्तीसगढ़ के करीब 66 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अब बिजली बिल तय तारीख के बाद जमा करने पर पूरे महीने का लेट पेमेंट सरचार्ज नहीं देना होगा। नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ता जितने दिन भुगतान में देरी करेगा, केवल उतने ही दिनों का अधिभार (ब्याज) लिया जाएगा।
Chhattisgarh Electricity Bill: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में प्रसारित हो रही ‘रोजाना ब्याज’ या ‘दोहरा झटका’ जैसी खबरें भ्रामक हैं। कंपनी के अनुसार राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के नए नियम का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना नहीं, बल्कि उन्हें राहत देना है।
Chhattisgarh Electricity Bill: पहले क्या था नियम?
Chhattisgarh Electricity Bill: अब तक यदि कोई उपभोक्ता बिजली बिल की निर्धारित तिथि से एक-दो दिन भी देर से भुगतान करता था, तो उससे पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाता था। यानी कम देरी होने पर भी पूरे महीने का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता था।
अब क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था के तहत लेट पेमेंट अधिभार प्रतिदिन के आधार पर लगेगा। इसके लिए 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर निर्धारित की गई है। यानी जितने दिन की देरी होगी, उसी अवधि का ब्याज लिया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई उपभोक्ता एक दिन देरी से बिल जमा करता है, तो उसे केवल 0.04 प्रतिशत अधिभार देना होगा। वहीं यदि 30 दिन बाद भुगतान किया जाता है, तब भी कुल 1.2 प्रतिशत (0.04 × 30 दिन) का ही अधिभार लगेगा, जो पहले के 1.5 प्रतिशत मासिक सरचार्ज से कम है।
उपभोक्ताओं को कैसे मिलेगा फायदा?
नई व्यवस्था से कम दिनों की देरी पर अतिरिक्त भुगतान काफी कम हो जाएगा। वहीं पूरे 30 दिन की देरी होने पर भी उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में कम अधिभार देना पड़ेगा। इससे बिजली बिल के लेट पेमेंट को लेकर उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ घटेगा।
Chhattisgarh Electricity Bill: अफवाहों से बचने की अपील
Chhattisgarh Electricity Bill: पावर कंपनी ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था में अधिभार की दर बढ़ाई नहीं गई है, बल्कि पहले की तुलना में कम हुई है। इसलिए इसे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ या रोजाना बढ़ने वाला नया ब्याज बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है। कंपनी ने आम लोगों और मीडिया से अपील की है कि वे केवल प्रमाणिक जानकारी साझा करें, ताकि उपभोक्ताओं के बीच किसी प्रकार का भ्रम न फैले।







