Microbrewery News: बीयर प्रेमियों के लिए खुशखबरी: छत्तीसगढ़ में मिलेगी अलग-अलग फ्लेवर वाली फ्रेश क्राफ्ट बीयर, सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी नीति को दी हरी झंडी

Microbrewery News: रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रीमियम पेय पदार्थों के शौकीनों और आतिथ्य उद्योग के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने प्रदेश में आधुनिक पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘माइक्रो ब्रुअरी’ (Micro Brewery) स्थापित करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के लागू होने के साथ ही आबकारी विभाग अब इच्छुक निवेशकों, बड़े रेस्टोरेंट और होटल संचालकों को नियमानुसार लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला मौका है जब स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली ‘ताजी क्राफ्ट बीयर’ के उत्पादन और बिक्री का रास्ता पूरी तरह साफ हुआ है। सरकार की इस पहल से जहां उपभोक्ताओं को नए विकल्प मिलेंगे, वहीं दूसरे राज्यों पर निर्भरता भी कम होगी।

लेमन से लेकर हनी तक: ग्राहकों को मिलेंगे कई विशिष्ट फ्लेवर

तकनीकी विशेषज्ञों और आबकारी विभाग के अनुसार, माइक्रो ब्रुअरी के धरातल पर उतरने के बाद लोगों को फैक्ट्रियों में बनने वाली पारंपरिक बीयर के बजाय एकदम फ्रेश और केमिकल-मुक्त क्राफ्ट बीयर का स्वाद लेने का अवसर मिलेगा। इस नई व्यवस्था के तहत ग्राहकों को लेमन, ऑरेंज, एप्पल, बेरी, व्हीट, डार्क और हनी (शहद) जैसे कई बेहद लोकप्रिय और स्वादिष्ट फ्लेवर का लुत्फ उठाने को मिलेगा। मेट्रो शहरों की तर्ज पर तैयार होने वाले ये विशिष्ट फ्लेवर छत्तीसगढ़ के युवाओं और बाहर से आने वाले कॉर्पोरेट पर्यटकों के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र बनेंगे।

निवेश, रोजगार और होटल-पर्यटन उद्योग को मिलेगी नई गति

शासन का मानना है कि इस नीतिगत फैसले से प्रदेश के होटल, रेस्टोरेंट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को एक नई आर्थिक मजबूती और गति हासिल होगी। बड़े शहरों में आने वाले सैलानियों के बीच क्राफ्ट बीयर की मांग निरंतर बढ़ रही है, जिसे देखते हुए यह कदम आतिथ्य उद्योग के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इस नई नीति के प्रभावी होने से राज्य में बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित होगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के सैकड़ों नए अवसर सृजित होंगे।

वित्तीय गणित: ₹10 लाख सालाना लाइसेंस फीस और ₹60 उत्पाद शुल्क तय

राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी उद्योग के विस्तार के साथ-साथ कड़े वैधानिक नियम और राजस्व के पुख्ता इंतजाम भी किए हैं:

  • लाइसेंस शुल्क: माइक्रो ब्रुअरी का संचालन करने वाले इच्छुक संस्थानों को प्रति वर्ष 10 लाख रुपये का फिक्स लाइसेंस शुल्क सरकारी खजाने में जमा करना होगा।

  • उत्पादन क्षमता: प्रत्येक स्वीकृत माइक्रो ब्रुअरी को प्रतिदिन अधिकतम केवल 1,000 लीटर क्राफ्ट बीयर उत्पादन करने की ही अनुमति दी जाएगी।

  • टैक्स और अनुमानित कीमत: उत्पादित होने वाली क्राफ्ट बीयर पर ₹60 प्रति बल्क लीटर की दर से उत्पाद शुल्क (Excise Duty) देय होगा। वहीं, व्यावसायिक जानकारों के मुताबिक उपभोक्ताओं के लिए इसके एक गिलास की अनुमानित कीमत करीब ढाई सौ से तीन सौ रुपये तक हो सकती है।

आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरी व्यवस्था का संचालन पूरी तरह से नियंत्रित होगा और गुणवत्ता मानकों तथा तय नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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