Tirupati Balaji: राम मंदिर दान विवाद से लिया सबक: तिरुपति बालाजी ने बदला दशकों पुराना नियम, अब ICAI संभालेगा करोड़ों के खजाने का डिजिटल हिसाब

Tirupati Balaji: नई दिल्ली। अयोध्या के सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक राम मंदिर में दान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी कथित गड़बड़ियों तथा घोटाले के आरोपों के सामने आने के बाद, देश के तमाम बड़े व प्रतिष्ठित धार्मिक ट्रस्ट अपनी वित्तीय व्यवस्थाओं को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं. इसी कड़ी में दुनिया के सबसे अमीर धार्मिक संस्थानों में शुमार, तिरुपति बालाजी मंदिर का प्रबंधन देखने वाले ‘तिरुमला तिरुपति देवस्थानम’ (TTD) ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. टीटीडी प्रशासन ने अपने समूचे अकाउंटिंग (खाता-बही) और ऑडिटिंग सिस्टम को पूरी तरह से आधुनिक, त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने के लिए देश की सर्वोच्च वित्तीय और लेखा संस्था ‘इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (ICAI) से हाथ मिलाया है.

100 दिनों का मिशन: ‘अकाउंटिंग रिसर्च फाउंडेशन’ तैयार कर रहा है नया डिजिटल ढांचा

आईसीएआई (ICAI) के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी. ने मीडिया को इस महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि संस्थान ने इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू कर दिया है और इसे आगामी 100 दिनों के भीतर पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इस पूरे वित्तीय कायाकल्प प्रोजेक्ट का नेतृत्व आईसीएआई की विशेष अनुसंधान विंग ‘अकाउंटिंग रिसर्च फाउंडेशन’ (ARF) कर रही है. मंदिर प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य अपने संपूर्ण वित्तीय ढांचे को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करना है ताकि किसी भी स्तर पर पारदर्शिता पर सवाल न उठ सके.

मैनुअल बहीखातों का अंत: पुरानी व्यवस्था की जगह लेगा ‘एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग’ (ERP) सिस्टम

तिरुपति मंदिर में वर्तमान में संचालित अकाउंटिंग सिस्टम लगभग दो से तीन दशक पुराना है. इस पारंपरिक व्यवस्था में बड़े पैमाने पर मैनुअल डेटा एंट्री और पुरानी पद्धतियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे अनजाने में होने वाली मानवीय चूक या वित्तीय लीकेज (गड़बड़ी) की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है.

अब आईसीएआई के तकनीकी और वित्तीय सहयोग से इस पुरानी मैन्युअल व्यवस्था को पूरी तरह से विस्थापित कर दिया जाएगा. इसके स्थान पर पूरे सिस्टम को ‘एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग’ (ERP) नामक एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जा रहा है. इस व्यापक बदलाव के तहत एक नया और कड़ा ‘अकाउंटिंग मैनुअल’ भी तैयार किया जा रहा है, जिससे मंदिर के खजाने में आने वाले हर एक पैसे, दानपेटी की नकदी, चेक, सोने-चांदी और देश-विदेश से होने वाले ऑनलाइन ट्रांसफर का सटीक, रीयल-टाइम डिजिटल रिकॉर्ड संधारित किया जा सकेगा.

देश के सभी धार्मिक और धर्मार्थ ट्रस्टों के लिए बनेगा एक मानक ‘ब्लूप्रिंट’

आईसीएआई इस व्यापक वित्तीय सुधार प्रोजेक्ट को केवल तिरुपति मंदिर तक ही सीमित नहीं रखना चाहता है. संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक, तिरुपति बालाजी मंदिर के लिए जो पारदर्शी और अचूक वित्तीय प्रणाली विकसित की जा रही है, वह भविष्य में देश के अन्य सभी बड़े मंदिरों, प्रख्यात धार्मिक ट्रस्टों और धर्मार्थ (चैरिटेबल) संगठनों के लिए एक आदर्श ‘ब्लूप्रिंट’ यानी मॉडल का काम करेगी. आने वाले समय में अन्य राष्ट्रीय संस्थान भी अपने यहाँ इस डिजिटल मॉडल को लागू कर सकेंगे, जिससे जनभावनाओं से जुड़े पैसे और जन-दान का किसी भी स्तर पर दुरुपयोग पूरी तरह रोका जा सके.

अयोध्या राम मंदिर विवाद की पृष्ठभूमि पर टिप्पणी करते हुए आईसीएआई के नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि किसी भी बड़े सार्वजनिक या धार्मिक संस्थान में मजबूत ‘आंतरिक वित्तीय नियंत्रण’ (Internal Financial Control) ही एकमात्र ऐसा अचूक जरिया है, जिससे किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी की आशंका को शत-प्रतिशत समाप्त किया जा सकता है. उल्लेखनीय है कि आईसीएआई के पास इस तरह के व्यापक प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों का एक लंबा व गौरवशाली इतिहास रहा है. इससे पहले यह संस्थान भारतीय रेलवे और इंडिया पोस्ट (डाक विभाग) जैसे विशाल सरकारी विभागों के लिए भी इसी तरह के जटिल और सफल वित्तीय सुधारों को बखूबी अंजाम दे चुका है.

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