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Testosterone Levels: पुरुषों में बढ़ता ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा: ‘लो टेस्टोस्टेरोन’ कैसे खोखली कर रहा है हड्डियां और बढ़ा रहा है फ्रैक्चर का जोखिम, जानें विशेषज्ञों की राय

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Testosterone Levels: नई दिल्ली। चिकित्सा जगत में ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) को लंबे समय से केवल महिलाओं, विशेषकर मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद की महिलाओं की बीमारी माना जाता रहा है। यही मुख्य वजह है कि अधिकांश पुरुष इस गंभीर स्वास्थ्य खतरे को नजरअंदाज करते हैं और इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि कमजोर हड्डियों की यह समस्या केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों के शरीर में भी हड्डियों का घनत्व (Bone Density) तेजी से कम हो सकता है, जिससे फ्रैक्चर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इस बीमारी की भयावहता यह है कि कई बार पुरुषों को तब तक इसका पता ही नहीं चलता, जब तक कि वे किसी मामूली चोट के कारण गंभीर फ्रैक्चर का शिकार न हो जाएं।

टेस्टोस्टेरोन सिर्फ यौन स्वास्थ्य के लिए नहीं, हड्डियों के निर्माण के लिए भी है जरूरी

आईएसआईसी (ISIC) मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के प्रमुख और वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक्स विशेषज्ञ डॉ. विवेक महाजन ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर इसलिए नजरअंदाज कर दिया जाता है क्योंकि उन्हें इस बात का कतई एहसास नहीं होता कि वे भी इसके दायरे में आ सकते हैं। ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे अपनी सघनता खोकर कमजोर और भुरभुरी होने लगती हैं। सामान्यतः मानव शरीर पुरानी हड्डियों के ऊतकों को हटाकर लगातार नई हड्डियों का निर्माण करता रहता है, परंतु उम्र बढ़ने के साथ यह प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है और हड्डियों का नुकसान नई बनने वाली हड्डियों की तुलना में अधिक तेजी से होने लगता है।

चिकित्सकीय शोधों के अनुसार, पुरुषों के शरीर में पाया जाने वाला टेस्टोस्टेरोन हार्मोन केवल मांसपेशियों के विकास, शारीरिक ऊर्जा और यौन स्वास्थ्य (Sexual Health) के लिए ही आवश्यक नहीं है, बल्कि यह हड्डियों की मजबूती और उनके ढांचे को बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। डॉ. विवेक महाजन के मुताबिक, यह हार्मोन जीवनभर पुरुषों के शरीर में नई हड्डियों के निर्माण और उनके रखरखाव में निरंतर मदद करता है। लेकिन जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र 40 या 50 के पार जाती है, उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर प्राकृतिक रूप से कम होने लगता है। इसका सीधा और घातक असर हड्डियों के स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे शरीर हड्डियों का तेजी से क्षरण करने लगता है।

‘लो टेस्टोस्टेरोन’ का दोहरा हमला: कम होती है मांसपेशियों की ताकत, बढ़ता है गिरने का डर

कम टेस्टोस्टेरोन का दुष्प्रभाव केवल हड्डियों को कमजोर करने तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर पर दोहरा हमला करता है। इस हार्मोन की कमी से पुरुषों में मांसपेशियों की ताकत और उनका द्रव्यमान (Muscle Mass) भी घटने लगता है। जब मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, तो शरीर का संतुलन बिगड़ता है और व्यक्ति के अचानक गिरने की संभावना बढ़ जाती है। एक तरफ कमजोर और भुरभुरी हड्डियां और दूसरी तरफ शारीरिक संतुलन बिगड़ने से गिरने की अधिक संभावना—ये दोनों कारक मिलकर फ्रैक्चर के जोखिम को अत्यंत गंभीर बना देते हैं। यही कारण है कि ढलती उम्र के पुरुषों में कूल्हे (Hip), रीढ़ की हड्डी (Spine) और कलाई (Wrist) के फ्रैक्चर के मामले सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं, जो कई बार उन्हें स्थायी रूप से बिस्तर पर ला देते हैं।

पहचानें ‘साइलेंट डिजीज’ के अदृश्य लक्षण

ऑस्टियोपोरोसिस की सबसे बड़ी चिकित्सीय चुनौती यह है कि इसके शुरुआती चरण में शरीर में कोई भी स्पष्ट या दर्दनाक लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसके कारण विशेषज्ञ इसे ‘साइलेंट डिजीज’ (Silent Disease) यानी खामोश बीमारी भी कहते हैं। हालांकि, यदि पुरुष अपने शरीर में होने वाले कुछ छोटे बदलावों पर ध्यान दें, तो इसे समय रहते पकड़ा जा सकता है:

  • शारीरिक संकेत: लगातार या पुराना पीठ दर्द होना।
  • शारीरिक संरचना में बदलाव: उम्र के साथ धीरे-धीरे लंबाई (Height) का कम होना या आगे की ओर झुकी हुई मुद्रा (Stooped Posture) का हो जाना।
  • कमजोरी: सामान्य काम करने पर भी लगातार शारीरिक कमजोरी और थकान महसूस होना।
  • हार्मोनल लक्षण: कम टेस्टोस्टेरोन के कारण सहनशक्ति (Stamina) में भारी कमी आना और मांसपेशियों का ढीला पड़ना।
  • गंभीर चेतावनी: किसी बेहद मामूली झटके या सामान्य चोट में भी अचानक हड्डी का टूट जाना।

बचाव ही सर्वोत्तम इलाज: जीवनशैली में करें ये जरूरी सुधार

राहत की बात यह है कि यदि समय रहते इस स्थिति की पहचान कर ली जाए, तो ऑस्टियोपोरोसिस और टेस्टोस्टेरोन की कमी से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका, धीमा और नियंत्रित किया जा सकता है। हड्डियों के ढांचे को दीर्घायु प्रदान करने के लिए विशेषज्ञों ने निम्नलिखित उपाय सुझाए हैं:

  1. पोषक आहार: अपने दैनिक भोजन में कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों को अनिवार्य रूप से शामिल करें।
  2. शारीरिक सक्रियता: हड्डियों और जोड़ों को सक्रिय रखने के लिए नियमित रूप से वॉक (पैदल चलना) करें।
  3. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने के लिए हल्के वजन के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज करें।
  4. व्यसनों से दूरी: धूम्रपान (Smoking) और अत्यधिक शराब के सेवन से पूरी तरह दूरी बनाएं, क्योंकि ये हड्डियों के घनत्व को सीधे नुकसान पहुंचाते हैं।
  5. वजन नियंत्रण: शरीर का वजन संतुलित बनाए रखें ताकि जोड़ों और रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
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VIKASH KHALKHO
VIKASH KHALKHO
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

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