Sunday, September 20, 2026
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Shujalpur Chakka Jam: शाजापुर में रास्ते की लड़ाई सड़क पर आई: भीलखेड़ी गांव में दबंगों की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों का चक्काजाम; न बिजली, न पानी के नारों से गूंजा हाईवे

Shujalpur Chakka Jam: शुजालपुर (शाजापुर): मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर क्षेत्र से इस वक्त ग्रामीण आक्रोश की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भीलखेड़ी गांव के ग्रामीणों का सब्र आखिरकार प्रशासनिक उपेक्षा और बुनियादी समस्याओं के चलते पूरी तरह टूट गया। वर्षों से रास्ते की गंभीर समस्या और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे ग्रामीणों ने सोमवार सुबह शुजालपुर-कालापीपल मार्ग पर चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव के कुछ दबंगों द्वारा उनका मुख्य रास्ता रोक दिया गया है, जिससे पूरी आबादी का आवागमन ठप हो गया है। कई बार आवेदन देने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।

“न रास्ता, न बिजली, न पानी” — मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीण

चक्काजाम के दौरान भारी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण तपती सड़क पर बैठ गए और शासन-प्रशासन के खिलाफ तीखी नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तख्तियां लिए ‘न रास्ता, न बिजली, न पानी’ के नारे लगा रहे थे। आंदोलनकारी महिलाओं का कहना था कि गांव में न तो पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही बिजली की अघोषित कटौती का कोई समाधान हो रहा है। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ खोखले आश्वासन देने तक सीमित हो जाएं, तो गरीब जनता अपनी फरियाद लेकर आखिर किसके पास जाए।

प्रशासनिक लापरवाही और अफसरों के रवैये से नाराजगी

ग्रामीणों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि रास्ते के इस विवाद को लेकर उन्होंने पूर्व में कई बार लिखित शिकायतें और चक्कर काटे। लेकिन हर बार कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की गई और धरातल पर दबंगों के हौसले बुलंद रहे। इसी संस्थागत शिथिलता के कारण भीलखेड़ी के लोगों को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा। इस हंगामे के चलते व्यस्त शुजालपुर-कालापीपल मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

तहसीलदार किरण धाकड़ ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा

हाईवे पर चक्काजाम और भारी हंगामे की सूचना मिलते ही राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए तहसीलदार किरण धाकड़ ने स्वयं मोर्चा संभाला और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनसे सीधे चर्चा की। वहीं, मंडी थाना पुलिस ने भी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोर्चा संभाला और आक्रोशित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर सड़क से हटाने तथा यातायात बहाल कराने की कवायद में जुटी रही।

पंचनामा बनाकर जल्द निराकरण का मिला आश्वासन

काफी देर तक चली समझाइश और तीखी बहस के बाद तहसीलदार किरण धाकड़ ने ग्रामीणों को वैधानिक कार्रवाई का लिखित और मौखिक भरोसा दिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि राजस्व विभाग की एक विशेष टीम को तुरंत भीलखेड़ी भेजा जा रहा है, जो मौके का मुआयना कर पंचनामा तैयार करेगी और दबंगों द्वारा रोके गए रास्ते संबंधी विवाद का स्थाई निराकरण कराएगी। प्रशासन के इस ठोस आश्वासन के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने चक्काजाम समाप्त किया, जिसके बाद ही मार्ग पर यातायात पुनः सुचारू रूप से शुरू हो सका। बहरहाल, प्रशासन ने समाधान का भरोसा तो दे दिया है, लेकिन स्थानीय जागरूक जनता का मानना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता, तो ग्रामीणों को सड़क पर बैठने की नौबत ही नहीं आती।

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