Sweet Corn Farming: रोशन सेन/मकड़ी। छत्तीसगढ़ का आदिवासी बाहुल्य कोण्डागांव जिला इन दिनों कृषि के क्षेत्र में एक नए और बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है। यहां के स्थानीय किसान अब केवल पारंपरिक धान की खेती तक ही सीमित नहीं रह गए हैं। इसके विपरीत वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए उन्नत किस्म की सब्जियों, नगदी फसलों और विशेष रूप से स्वीट कॉर्न की खेती कर अपनी घरेलू आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं। जिले के भीतर कृषि के क्षेत्र में हो रहे इस बेहद सकारात्मक और क्रांतिकारी बदलाव का एक बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक उदाहरण बड़ेराजपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम मारंगपुरी में देखने को मिला है। यहां के निवासी प्रगतिशील किसान श्री रामचंद्र साहू ने स्वीट कॉर्न की खेती को एक मुख्य व्यवसाय के रूप में अपनाकर ग्रामीण अंचल में आर्थिक समृद्धि की एक नई और अनूठी पहचान बनाई है।
रामचंद्र साहू पिछले तीन वर्षों से अपने खेतों में लगातार वैज्ञानिक पद्धति से स्वीट कॉर्न का सफल उत्पादन कर रहे हैं।
ढाई एकड़ भूमि में लगाई अशोका किस्म
किसान के बेटे श्री राजेन्द्र साहू ने इस कृषि यात्रा के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि स्थानीय बाजार में स्वीट कॉर्न की लगातार बढ़ती हुई मांग और इससे मिलने वाले बेहतर लाभ को देखते हुए इस वर्ष उन्होंने लगभग ढाई एकड़ कृषि भूमि में उन्नत अशोका किस्म के स्वीट कॉर्न की बुआई की है। इस पूरी फसल को तैयार करने के लिए उन्होंने बाजार से लगभग सात किलोग्राम प्रामाणिक बीज का उपयोग किया था जिस पर उनकी कुल लागत लगभग इक्कीस हजार रुपये के आसपास आई थी। आधुनिक खेती की वैज्ञानिक पद्धतियों को जमीनी स्तर पर अपनाते हुए उन्होंने समय पर फसल प्रबंधन और कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया। यही कारण है कि आज उनके खेतों में लहलहा रही फसल का सकारात्मक परिणाम उन्हें बेहतर उत्पादन और अच्छी आय के रूप में सीधे प्राप्त हो रहा है।
कम समय में दो लाख रुपये की बंपर कमाई
राजेन्द्र साहू के अनुसार सामान्य देसी मक्का की तुलना में आधुनिक स्वीट कॉर्न की शहरी और स्थानीय बाजार में मांग बहुत अधिक रहती है। उनके खेतों में तैयार हुई इस फसल का प्रत्येक भुट्टा बाजार में व्यापारियों को आसानी से लगभग सात रुपये प्रति नग की थोक दर से विक्रय हो जाता है। मुख्य रूप से अप्रैल महीने से लेकर जुलाई महीने के बीच तैयार होने वाली इस नगदी फसल से उन्हें एक ही सीजन के भीतर लगभग दो लाख रुपये तक की शुद्ध आय बहुत ही आसानी से प्राप्त हो जाती है। बहुत कम समय की अवधि में बेहतर और सुरक्षित आर्थिक लाभ मिलने के कारण ही स्वीट कॉर्न आज जिले के अन्य छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी एक बेहद लाभकारी और सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर कर सामने आ रही है।
नैनो यूरिया के प्रयोग से मिली बेहतर गुणवत्ता
फसल की बाहरी गुणवत्ता को सुधारने एवं कुल उत्पादन को बढ़ाने के लिए श्री रामचंद्र साहू अपने खेतों में पारंपरिक खाद के स्थान पर नैनो यूरिया का भी नियमित उपयोग कर रहे हैं। उनके व्यावहारिक अनुभव के अनुसार नैनो यूरिया के छिड़काव से फसल की आंतरिक वृद्धि बहुत बेहतर हुई है। इसके साथ ही पौधों के समग्र विकास और भुट्टों के दानों के आकार में भी कई सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी कृषि योजनाओं का समय पर पूरा लाभ लेकर अपनी खेती की व्यवस्था को पहले के मुकाबले और अधिक सशक्त और आधुनिक बना लिया है।
सरकारी योजनाओं से मजबूत हुई सिंचाई व्यवस्था
प्रगतिशील किसान रामचंद्र साहू को जिला कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत शत प्रतिशत अनुदान पर शैलो ट्यूबवेल तथा आधुनिक स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का लाभ भी प्राप्त हुआ है। इन उन्नत सरकारी सुविधाओं के माध्यम से उनके खेत की सिंचाई व्यवस्था बहुत मजबूत हो गई है जिसके कारण अब बेहद कम पानी के उपयोग में भी अधिक क्षेत्र की गुणवत्तापूर्ण सिंचाई संभव हो पा रही है। इस सूक्ष्म सिंचाई तकनीक के उपयोग से जहां एक तरफ खेती की कुल लागत में भारी कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण की मुहिम को भी बड़ा बढ़ावा मिला है।
कोण्डागांव के कृषि परिदृश्य में बड़ा बदलाव
वर्तमान में कोण्डागांव जिले के कृषि परिदृश्य में बहुत तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। जिले के मारंगपुरी और आसपास के गांवों के सैकड़ों किसान अब पारंपरिक फसलों के मोह से बाहर निकलकर नगदी फसलों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। आधुनिक तकनीकों, उन्नत प्रमाणित बीजों, नैनो उर्वरकों और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के सम्मिलित उपयोग ने किसानों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। अंततः, रामचंद्र साहू की यह सफलता यह साबित करती है कि अगर सही सरकारी सहयोग और आधुनिक सोच का मिलन हो, तो खेती को एक बेहद मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है।









