MP NEWS :छिंदवाड़ा। जिले में बसे बेशकीमती जंगलों में लहरा रहे हरे भरे पेड़ इन दिनों तस्करों की नजरों में है। आए दिन जंगल में लगे सागौन के पेड़ों को काट कर बदमाशों द्वारा उन्हें फर्नीचर व्यापारियों को महंगे दामो में बेचा जा रहा है । ऐसा ही एक मामला पश्चिम वन मंडल मोहखेड़ सर्किल की लोहांगी बिट से सामने आया है। जहां बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात में एक दर्जन से अधिक हरे भरे सागौन के पेड़ों को काटकर तस्कर रफूचक्कर हो गए है ।
MP NEWS :सूत्रों की माने लोहांगी से देवगढ़ जाने वाले मार्ग से लगे हरे भरे पेड़ो को पहले रात में काटा गया और सुबह के समय इन कटे पेड़ो को ले जाने के लिए वाहन भी आया। लेकिन सुबह के वक्त ग्रामीणों की नजर जैसे ही इन कटे पेड़ो पर पड़ी। उन्हें देखते ही तस्कर मौके से चौपहिया वाहन लेकर रफूचक्कर हो गए। ऐसा नही है कि इसकी भनक वन विभाग को नही है । लेकिन अपने लचर प्रणाली के चलते इन दिनों जंगलो में बसे वन और वन्य प्राणी सुरक्षित नही है । इसके पूर्व भी इसी क्षेत्र में अवैध कटाई और रेत तस्करी का मामला सामने आया था। उसके बाद भी वन विभाग मानों कुंभकर्ण नींद में सोया है। या यह कहना गलत नही होगा अब जंगल भगवान भरोसे है । वन और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के सरकार करोड़ों का बजट स्वीकृत करती है । उसके बाद भी वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी गम्भीर नजर नही आते है ।
MP NEWS :कटे हुए ठूंस को छुपाने में जुटा वन अमला
MP NEWS :एक दर्जन से अधिक की सँख्या में कटे सागौन पेड़ों के ठूंस को अब मोहखेड़ वन अमला छुपाने में जुट गया है। सूत्रों की मानें तो जिम्मेदार अधिकारी अब इन पेड़ों को आंधी तूफान से गिरना बता रहे है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह पेड़ महज क्या सड़क के समीप के ही गिरे जंगलों में लगे अन्य पेड़ो क्यों नही गिरे। जबकि यह पेडों की जो कटाई हुई है यह सारे पेड़ ताजे है। जो आंधी तूफान से नही गिर सकते जबकि आंधी तूफान के असर सिर्फ सूखे पेड़ो पर ही होता है। मोहखेड़ सर्किल का वन अमला विभाग के उच्च अधिकारियों के निरीक्षण के पहले ही अवैध कटाई छुपाने की जुगत में जुट गया है।
MP NEWS :पेड़ो में छाल मारकर सूखाने का खेला
MP NEWS :सागौन तस्कर इतने बेखोफ है कि वह सागौन तस्करी का पूरा खेल व्यवस्थित और रूप से करते है । सबसे पहले तस्करो के नुमाइंदे जंगल का नजर रखते है । फिर कुछ चयनित हरे भरे पेड़ो पर कुल्हाड़ी से छाल मारकर छोड़ देते है । और कुछ 20 से 25 दिनों बाद जब पेड़ सूखने लगता है तो उसे आसानी से काटकर बचे हुए ठूंठ और उनके आसपास आग लगाकर सागौन लेकर रफूचक्कर हो जाते है । यह खेल पूरा विधिवत किया जाता है। ऐसा नही है इसकी भनक वन विभाग को नही है । लेकिन कुछ कर्मचारियों से सांठगांठ कर सागौन तस्कर तस्करी का खेल को अंजाम दे रहे है और वन विभाग हाथ मे हाथ रखकर तमाशा देख रहा है ।
MP NEWS :65 से 75 गोलाई सागौन के पेड़ों को बनाया निशाना
MP NEWS :जानकारी के मुताबिक जो कटे हुए सागौन के पेड़ है। इनकी गोलाई 65 से 75 के बीच की है। जो कि इनकी गिनती ताजे पेड़ो से की जाती है। यह सागौन के पेड़ बेशकीमती होते है। जानकारों की मानें तो यह एक पेड़ 10 से 12 हजार रु की कीमत का होता है। जिस क्षेत्र में पेड़ कटते हैं उस क्षेत्र के सर्किल अधिकारी कर्मचारियों के ऊपर पेड़ो की कीमत रिकवरी निकलती है। लेक़िन अब देखना होगा कि क्या वन विभाग के उच्च अधिकारी इस और ध्यान देते है या हमेशा की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।




