Dantewada Iron Ore Mine Controversy: दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद इन दिनों छत्तीसगढ़ में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। बस्तरिया राज मोर्चा ने आरोप लगाया है कि दंतेवाड़ा जिले के अलनार क्षेत्र स्थित एक लौह अयस्क खदान में कई वर्षों से खनन नहीं हुआ, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में लाखों टन लौह अयस्क उत्पादन दर्ज कर दिया गया।इस दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद ने खनन व्यवस्था और सरकारी रिकॉर्ड की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है।
ताजा दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद अलनार क्षेत्र की एक लौह अयस्क खदान से जुड़ा है। बस्तरिया राज मोर्चा का दावा है कि संबंधित खदान में करीब 9 वर्षों से खनन गतिविधियां नहीं हुईं, फिर भी वर्ष 2018 से 2025 के बीच सरकारी रिकॉर्ड में लगभग 2 लाख 72 हजार 181 टन लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया गया।संगठन का कहना है कि यह आंकड़ा कई गंभीर सवाल खड़े करता है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
खनन नहीं तो उत्पादन कैसे?
दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि खदान में नियमित खनन नहीं हुआ तो फिर लाखों टन लौह अयस्क उत्पादन का रिकॉर्ड कैसे तैयार हुआ।मोर्चा की जिला संयोजक विमला सोरी ने दावा किया है कि खदान क्षेत्र तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सड़क व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में खनिज के उत्खनन और परिवहन को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।
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आलनार इलाके स्थित तरल पहाड़ की लौह अयस्क खदान रायपुर की आरती स्पंज एंड पावर कंपनी को लीज पर दी गई है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी ने दावा किया है कि पिछले 9 वर्षों के दौरान इस खदान से करीब 2.75 लाख टन लौह अयस्क का खनन किया गया।रिकॉर्ड में यह भी उल्लेख है कि खनिज के परिवहन के लिए पांच ट्रकों का उपयोग किया गया। हालांकि इसी दावे को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है। बस्तरिया राज मोर्चा और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में लौह अयस्क का उत्खनन हुआ है, तो उसके अनुरूप जमीनी स्तर पर गतिविधियां, परिवहन व्यवस्था और अन्य प्रमाण भी दिखाई देने चाहिए थे।
इसी मुद्दे को लेकर दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद और गहरा गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि खदान क्षेत्र में लंबे समय से बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां दिखाई नहीं दीं, जबकि रिकॉर्ड में लाखों टन उत्पादन दर्ज है। ऐसे में अब खनन, परिवहन और बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग तेज हो गई है।
पांच ट्रकों से लाखों टन परिवहन पर भी उठे सवाल
दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद में पांच ट्रकों के जरिए 2.75 लाख टन लौह अयस्क परिवहन किए जाने के दावे पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में खनिज के परिवहन के लिए लगातार भारी वाहन संचालन, सड़क उपयोग और लॉजिस्टिक गतिविधियों के प्रमाण मिलने चाहिए।इसी कारण अब जांच की मांग केवल खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन रिकॉर्ड, रॉयल्टी भुगतान, बिक्री दस्तावेज और खनिज विभाग के अभिलेखों की भी जांच की मांग की जा रही है। प्रशासन ने कहा है कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी।
परिवहन और बिक्री रिकॉर्ड पर भी सवाल
आरोप लगाने वालों का कहना है कि दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद की सच्चाई जानने के लिए उत्पादन के साथ-साथ परिवहन, भंडारण और बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच जरूरी है।यदि वास्तव में लाखों टन लौह अयस्क निकाला गया, तो उसके परिवहन और बिक्री से जुड़े स्पष्ट रिकॉर्ड भी उपलब्ध होने चाहिए। इसी आधार पर संगठन ने विस्तृत जांच की मांग उठाई है।
स्थानीय लोगों ने भी उठाए सवाल
दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से खदान क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां नहीं देखीं। उनके अनुसार, रिकॉर्ड में दर्ज उत्पादन के अनुरूप न तो भारी मशीनें दिखाई दीं और न ही बड़ी संख्या में मालवाहक वाहनों की आवाजाही देखी गई।इसी वजह से उत्पादन के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच और एफआईआर की मांग
बस्तरिया राज मोर्चा ने दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। संगठन ने जिला प्रशासन, पुलिस और खनिज विभाग को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है।संगठन का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
राजनीतिक पहलू भी चर्चा में
दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं। कुछ स्थानीय लोगों और संगठन के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि संबंधित कंपनी के संचालकों के राजनीतिक संबंध होने के कारण मामले पर सवाल उठ रहे हैं।हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासन ने क्या कहा?
इस पूरे दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद पर प्रशासन की ओर से जांच का आश्वासन दिया गया है। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त हुई है और सभी तथ्यों की जांच की जाएगी।प्रशासन का कहना है कि रिकॉर्ड, भौतिक सत्यापन और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।फिलहाल दंतेवाड़ा लौह अयस्क खदान विवाद आरोपों और सवालों के केंद्र में है। एक ओर लाखों टन उत्पादन दर्ज होने का दावा है, तो दूसरी ओर खनन गतिविधियां न होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में कितना अंतर है और क्या वास्तव में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है।









