Raigarh Coal Scam: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। एनटीपीसी तलाईपाली माइंस से कारीछापर रेलवे साइडिंग के माध्यम से जाने वाले कोयले में बड़े पैमाने पर मिलावट खोरी की गंभीर शिकायत सामने आई है। इस शिकायत के बाद आखिरकार खनिज विभाग को भी हरकत में आते हुए अपनी कलम चलानी पड़ गई है। विभाग ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एनटीपीसी के अधिकारियों को पत्र जारी कर बिंदुवार जानकारी मांगी थी। इसके विपरीत एनटीपीसी कंपनी ने अपने जवाब में मिलावट के ऐसे किसी भी अवैध धंधे और शिकायत को पूरी तरह से निराधार बताया है। कंपनी ने खुद को पाक-साफ बताते हुए मिलावट के लिए दूसरी और निजी साइडिंग का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया है।
कारीछापर रेलवे साइडिंग पर छाई मिलाने का खेल
प्राप्त शिकायत के अनुसार तलाईपाली खदान से भारी मात्रा में कोयला लोड करके सड़क मार्ग के जरिए कारीछापर रेलवे साइडिंग तक ले जाया जाता है। वहां पहले से ही डंप करके रखी गई बेक फ़िल्टर डस्ट (कोयला चूरा) को शातिर तरीके से कीमती कोयले में मिला दिया जाता है। इसके बाद इस मिलावटी कोयले को मालगाड़ी की रैक में लोड करके आगे सप्लाई के लिए भेज दिया जाता है। इस पूरी कालाबाजारी के खेल में स्थानीय बड़े ट्रांसपोर्टर और कोयले का अवैध धंधा करने वाले माफिया रातों-रात मालामाल हो रहे हैं।
निजी साइडिंग का बहाना बनाकर अफसरों ने खुद को बचाया
खनिज विभाग द्वारा नोटिस जारी कर पक्ष रखने का अवसर दिए जाने पर एनटीपीसी के अफसरों ने तुरंत एक नया पैंतरा चल दिया। दरअसल कारीछापर में एनटीपीसी की साइडिंग के अलावा दूसरी निजी रेलवे साइडिंग भी संचालित हैं। यही कारण है कि एनटीपीसी के अफसरों ने अपने पूरे सिस्टम को ‘ऑल इज वेल’ बता दिया। इसके विपरीत उन्होंने खनिज अधिकारियों के सामने दूसरी निजी साइडिंग में मिलावट होने का अंदेशा जताते हुए खुद को बचा लिया।
बड़े चेहरों को बचाने के लिए लीपापोती का आरोप
विभागीय सूत्रों की मानें तो एनटीपीसी के कोयले में भी अंदरखाने मिलावट का यह बड़ा खेल लंबे समय से चल रहा था। चर्चा है कि यदि इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होती तो क्षेत्र के कई बड़े और रसूखदार चेहरे बेनकाब हो जाते। फलस्वरूप कंपनी के अफसरों और रसूखदार ट्रांसपोर्टरों ने आपस में मिलकर इस पूरे मामले में कागजी लीपापोती करवा दी। यही वजह है कि खुद को बचाने के लिए दूसरी साइडिंग में मिलावट होने का रायता फैलाया गया।
खनिज विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का आरोप है कि विभाग ने शिकायत मिलने के बाद केवल कागजी खानापूर्ति वाली जांच की है। अधिकारियों ने एनटीपीसी के गोलमोल जवाब को ही सच मानकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अंततः क्षेत्र के लोगों ने इस पूरे कोयला मिलावट खेल की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग कलेक्टर से की है।










