Crime Proceeds Seized: जबलपुर। मध्य प्रदेश की न्यायधानी जबलपुर की एक अदालत ने कोर्ट के आदेशों और डिक्री की खुलेआम अवहेलना कर विवादित जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने के मामले में बेहद सख्त और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जबलपुर (न्यायाधीश श्री डी.पी. सूत्रकार) ने मामले के तीन मुख्य अभियुक्तों के बैंक खातों को कुर्क करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन खातों में जमा ₹2.89 करोड़ की मोटी रकम को तत्काल प्रभाव से होल्ड (फ्रीज) करने के निर्देश जारी किए गए हैं। अदालत ने इस संबंध में साइबर शाखा जबलपुर और माढ़ोताल थाना प्रभारी को पत्र जारी कर त्वरित वैधानिक कार्रवाई करने को कहा है।
30 साल पुराना है जमीनी विवाद, कोर्ट की डिक्री को ठेंगा दिखाकर बेची जमीन
यह पूरा हाई-प्रोफाइल मामला परिवादी सुभाषचन्द्र केसरवानी और आरोपी पक्ष (दीक्षितपुरा कॉलोनी, जबलपुर निवासी) राजेश कुमार अवस्थी, कु. रश्मि अवस्थी तथा श्रीमती गीता अवस्थी के बीच का है। परिवादी सुभाषचन्द्र और आरोपियों के दिवंगत पिता स्व. योगेशचंद्र अवस्थी के बीच इस बेसकीमती जमीन को लेकर 13 मार्च 1995 से सिविल कोर्ट में कानूनी लड़ाई चल रही थी। इस लंबे विवाद के बाद एक सक्षम सिविल अदालत ने परिवादी सुभाषचन्द्र के पक्ष में अंतिम निर्णय (डिक्री) पारित कर दी थी। कोर्ट ने अवस्थी परिवार को आदेश दिया था कि वे तय विधिक प्रक्रिया के तहत सुभाषचन्द्र के पक्ष में ही जमीन का विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) निष्पादित करें।
ज्यादा मुनाफे के लालच में ₹2.89 करोड़ में किया सौदा
परिवादी के वरिष्ठ अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने न्यायालय के समक्ष अकाट्य तर्क प्रस्तुत करते हुए बताया कि तीनों आरोपियों को इस बात की पूरी और अच्छी तरह से जानकारी थी कि सक्षम अदालत ने उक्त जमीन की रजिस्ट्री सुभाषचन्द्र के नाम करने का आदेश दिया है। इसके बावजूद, केवल अधिक आर्थिक लाभ कमाने और परिवादी को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से आरोपियों ने पिछले साल 26 दिसंबर 2024 को उस डिक्रीशुदा जमीन को कोर्ट की नजरों से छिपाकर किसी अन्य तीसरे खरीदार को ₹2,89,00,000 (दो करोड़ नवासी लाख रुपये) में बेच दिया और पूरी राशि खुद हड़प ली।
अदालत ने माना ‘अपराध की कमाई’, BNSS की धारा 107 के तहत एक्शन
परिवादी की शिकायत के बाद थाना माढ़ोताल में अपराध क्रमांक 485/2025 दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), धारा 243 (अदालती आदेश के निष्पादन को विफल करने के लिए संपत्ति छिपाना या ट्रांसफर करना) और धारा 244 (अवैध तरीके से संपत्ति पर अधिकार जताना) के तहत चालान कोर्ट में पेश किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश श्री डी.पी. सूत्रकार ने स्पष्ट माना कि आरोपियों ने अदालत की डिक्री का जानबूझकर उल्लंघन किया और अवैध रूप से लाभ कमाया। अतः जमीन बेचकर हासिल किए गए ₹2.89 करोड़ पूरी तरह से ‘अपराध का आगम’ (Proceeds of Crime) हैं।
न्यायालय ने देश के नए कानून ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023’ की धारा 107 के तहत प्रदत्त विशेष शक्तियों का कड़ाई से उपयोग करते हुए तीनों आरोपियों के पंजीकृत मोबाइल नंबरों (99933020505, 9039299570, 6261146392) से लिंक सभी बैंक खातों में ₹2.89 करोड़ तक की राशि को तत्काल कुर्क और होल्ड करने के निर्देश दे दिए। अदालत ने अब इस मामले में आरोपियों पर विधिवत आरोप तय करने और अंतिम तर्कों को सुनने के लिए 18 जून 2026 की अगली तारीख नियत की है।

















