रुपया बनाम डॉलर की जंग में गुरुवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। लगातार नौ दिनों तक कमजोरी झेलने के बाद भारतीय रुपया आखिरकार मजबूती के साथ उभरा। डॉलर के मुकाबले रुपया 41 पैसे तक मजबूत हुआ, जिससे करेंसी बाजार में नई हलचल पैदा हो गई।
डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले कुछ दिनों से लगातार दबाव में था। हालात ऐसे बन गए थे कि डॉलर का स्तर 97 के करीब पहुंच गया और भारतीय मुद्रा अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर दिखाई दी। इससे आयात, ईंधन और विदेशी भुगतान को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
ट्रंप के बयान ने बदली तस्वीर
रुपए में तेजी की वजह उस समय सामने आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि ईरान के साथ शांति वार्ता अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजार में तनाव थोड़ा कम हुआ और निवेशकों का भरोसा लौटता दिखा।
कच्चे तेल की कीमतों से मिली राहत
कच्चे तेल का असर रुपए पर भी साफ दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आईं, जिससे भारतीय मुद्रा को सहारा मिला। भारत जैसे आयातक देश के लिए तेल की कीमतों में गिरावट राहत भरी खबर मानी जाती है।
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शुरुआती कारोबार में रुपया मजबूत
भारतीय मुद्रा बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 96.25 पर खुला और बाद में 96.45 तक पहुंच गया। इससे पहले रुपया 96.95 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार भावनाओं और भू-राजनीतिक संकेतों पर तेजी से प्रतिक्रिया दे रहा है।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
रुपया-डॉलर विनिमय दर को लेकर फॉरेक्स विशेषज्ञों का कहना है कि 97 का स्तर अभी भी बड़ा प्रतिरोध बना हुआ है। वहीं 95.50 से 95.80 के बीच मजबूत सपोर्ट देखने को मिल सकता है। जानकारों के मुताबिक यदि मध्य पूर्व में तनाव फिर बढ़ता है तो रुपए पर दोबारा दबाव बन सकता है।
RBI की भूमिका पर टिकी नजर
भारतीय रिजर्व बैंक की रणनीति भी बाजार के लिए अहम बनी हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि RBI की तरलता सहायता और हस्तक्षेप से रुपए को अस्थायी राहत मिल सकती है। हालांकि लंबे समय तक स्थिरता के लिए वैश्विक हालात सामान्य होना जरूरी माना जा रहा है।
शेयर बाजार में भी दिखा असर
भारतीय शेयर बाजार अपडेट के अनुसार रुपए में सुधार का असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि यदि वैश्विक तनाव और तेल कीमतें नियंत्रित रहीं तो बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं
मध्य पूर्व तनाव और डॉलर अभी भी वैश्विक बाजार की सबसे बड़ी चिंता बने हुए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान और इजराइल को लेकर अमेरिका की रणनीति पर मतभेद जारी हैं। ऐसे में किसी भी बड़े घटनाक्रम का असर सीधे डॉलर और रुपए की चाल पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
रुपया बनाम डॉलर की अगली दिशा अब वैश्विक राजनीति, कच्चे तेल और अमेरिकी आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। फिलहाल रुपए की वापसी ने बाजार को थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी मानी जा रही है।








