Thursday, August 20, 2026
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Health Department MP: भोपाल में स्वास्थ्य विभाग पर कुर्की की गाज: 2011 के भुगतान विवाद में कोलकाता हाईकोर्ट की टीम ने दी दबिश

Health Department MP: भोपाल। मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग (स्वास्थ्य संचालनालय) में गुरुवार को उस समय हड़कंप और अफरा-तफरी मच गई, जब कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश पर एक विशेष टीम विभाग में कुर्की की बड़ी कार्रवाई करने पहुंच गई। यह पूरा मामला साल 2011 में स्वास्थ्य विभाग को सप्लाई किए गए इंसेंटिसाइड (कीटनाशक) के बकाया भुगतान से जुड़ा हुआ है। निजी कंपनी का आरोप है कि करीब 15 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट व जबलपुर हाईकोर्ट के कड़े आदेशों के बावजूद प्रदेश सरकार ने उनका भुगतान नहीं किया, जिसके चलते अब विवश होकर कोर्ट के निर्देश पर संपत्ति जब्त (कुर्की) करने की यह नौबत आई है।

₹50 लाख का मूलधन, ब्याज जुड़कर अब हुआ ₹5 करोड़

कोलकाता से भोपाल पहुंचे नीतापुर इंडस्ट्रीज के कंपनी प्रतिनिधि ने बताया कि उनकी कंपनी ने वर्ष 2011 में डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विसेज (स्वास्थ्य सेवाएं) को मलेरिया व अन्य संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए लगभग 50 लाख 70 हजार रुपए के इंसेंटिसाइड की सप्लाई की थी। माल की सुरक्षित डिलीवरी होने के बाद भी विभाग द्वारा इसका भुगतान अटका कर रख दिया गया। इसके बाद यह विवाद पहले आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) में गया, जहां से कंपनी के पक्ष में फैसला आया। इसके खिलाफ शासन ने अपील की और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। करीब एक वर्ष पहले प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत से मोहलत लेते हुए जल्द भुगतान का आश्वासन दिया था, लेकिन राशि फिर भी जारी नहीं हुई। कंपनी प्रतिनिधि के मुताबिक, बाद में जबलपुर हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई, जहां स्टांप ड्यूटी सहित सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। 15 साल बीतने के कारण अब मूल राशि पर कंपाउंडिंग इंटरेस्ट (चक्रवृद्धि ब्याज) जुड़कर यह कुल बकाया लगभग 5 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।

80 वर्षीय बुजुर्ग मालिक की कंपनी झेल रही आर्थिक संकट

कंपनी के प्रतिनिधि ने मीडिया को बताया कि “नीतापुर इंडस्ट्रीज” एक बेहद छोटी प्रोपराइटरशिप (एकल स्वामित्व वाली) कंपनी है। इसके मुख्य मालिक की उम्र अब करीब 80 वर्ष हो चुकी है और वे अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर न्याय के लिए भटक रहे हैं। लंबे समय से करोड़ों रुपए का सरकारी भुगतान फंसे होने के कारण कंपनी गंभीर आर्थिक संकट और दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों पर आरोप लगाया कि अदालतों के स्पष्ट और कड़े आदेशों के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता और लेट-लतीफी के कारण बुजुर्ग व्यापारी को प्रताड़ित होना पड़ रहा है।

अधिकारियों में मची हलचल, सरकारी जवाब का इंतजार

गुरुवार दोपहर जैसे ही कोलकाता की टीम कुर्की का वारंट लेकर मंत्रालय और संचालनालय के चक्कर काटने लगी, विभागीय अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। दफ्तरों में आनन-फानन में फाइलों को खंगाला जाने लगा और कानूनी सलाहकारों की मदद ली जा रही है। फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल कुर्की की कार्रवाई और जब्ती की सूची को लेकर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों में बैठकों का दौर जारी है। हालांकि, इस पूरे संवेदनशील मामले में अभी तक स्वास्थ्य विभाग या राज्य सरकार की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या लिखित प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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