नई दिल्ली: जब भी दुनिया के सबसे खतरनाक और आदमखोर जीवों की चर्चा होती है, तो इंसानी जेहन में शार्क, बिच्छू, शेर या कोबरा जैसे जहरीले सांपों का खौफ उभरता है। हालांकि, वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़े एक बेहद चौंकाने वाली और अलग ही हकीकत बयां करते हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, इंसानी जान का सबसे बड़ा दुश्मन कोई विशालकाय या आदमखोर जानवर नहीं, बल्कि हमारे घरों में मंडराने वाला एक छोटा सा पिद्दी जीव—मच्छर है। अपने सूक्ष्म आकार के बावजूद, मच्छर को इस धरती का Deadliest Living Creature (सबसे जानलेवा जीवित जीव) घोषित किया गया है।
इंसानी हिंसा और युद्ध से भी ज्यादा खतरनाक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और वैश्विक स्वास्थ्य डेटा के अनुसार, मच्छरों के कारण होने वाली मौतें यानी Mosquito-Borne Fatalities का आंकड़ा बेहद डरावना है। दुनिया भर में मच्छरों की वजह से हर साल लगभग 7,25,000 लोग अपनी जान गंवा देते हैं। यदि इसकी तुलना इंसानी क्रूरता से की जाए, तो दुनिया भर में आपसी युद्धों, अपराधों और इंसानी हिंसा के कारण हर साल करीब 4,75,000 मौतें होती हैं। वहीं, पूरी दुनिया में सांपों के काटने से लगभग 50,000 लोग मरते हैं और शेरों के हमलों में मरने वालों की संख्या तो बेहद कम है। इस लिहाज से मच्छर इंसानों को मारने में सबसे आगे हैं।
जानलेवा बीमारियों का चलते-फिरते गोदाम मच्छर असल में सिर्फ अपने काटने के दर्द या खून चूसने की वजह से खतरनाक नहीं होते। इनका सबसे घातक पहलू यह है कि ये जानलेवा वायरस और पैरासाइट्स के लिए ‘कैरियर’ (वाहक) का काम करते हैं। जब एक संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ इंसान को काटता है, तो वह सीधे उसके रक्त में खतरनाक बीमारियां ट्रांसफर कर देता है। यही कारण है कि दुनिया भर में Vector-Borne Disease Threat (वाहक जनित बीमारियों का खतरा) तेजी से बढ़ रहा है। इसके कारण डेंगू, चिकनगुनिया, जीका वायरस और पीत ज्वर (येलो फीवर) जैसी महामारियां हर साल करोड़ों लोगों को अपनी चपेट में ले लेती हैं। विशेषकर गर्म जलवायु और रुके हुए पानी वाले विकासशील देशों में इनकी आबादी अनियंत्रित रूप से बढ़ती है।
मलेरिया का जानलेवा डंक (Malaria Mortality Rate) मच्छरों द्वारा फैलाई जाने वाली तमाम बीमारियों में ‘मलेरिया’ आज भी दुनिया के लिए सबसे बड़ा काल बना हुआ है। संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर द्वारा फैलाए जाने वाले इस रोग के कारण Malaria Mortality Rate (मलेरिया मृत्यु दर) में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। हर साल लाखों लोग, विशेषकर अफ्रीका और एशिया के सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले नवजात बच्चे और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग इस बीमारी के कारण दम तोड़ देते हैं। चिकित्सा विज्ञान में इतनी प्रगति के बावजूद, मलेरिया को पूरी तरह खत्म करना आज भी नामुमकिन साबित हो रहा है।
वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती आज के दौर में मच्छरों पर नियंत्रण पाना किसी एक देश की नहीं, बल्कि एक Global Health Challenge (वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती) बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आम जनता जागरूक नहीं होगी और अपने आसपास जलभराव को नहीं रोकेगी, तब तक इस ‘महीन शिकारी’ के कहर से मानवता को बचा पाना असंभव होगा।









