निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के लिए सोमवार को चुनाव प्रचार थम गया। अब 29 अप्रैल को राज्य की 142 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंतिम दिन कई बड़ी रैलियां और रोड शो हुए, जिसमें प्रमुख दलों ने पूरी ताकत झोंक दी।
कटे वोटर्स पर बड़ा सवाल
इस चरण से पहले सबसे बड़ा मुद्दा वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों का है। न्यायिक जांच प्रक्रिया (SIR) के दौरान करीब 12.9 लाख वोटर्स के नाम काट दिए गए थे। अब यह देखना अहम होगा कि इनमें से कितनों को दोबारा मतदान का अधिकार मिल पाता है।
सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन से उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार, जिन वोटर्स के नामों को SIR ट्रिब्यूनल मंजूरी देगा, उन्हें चुनाव से 48 घंटे पहले सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट में जोड़ा जा सकता है। हालांकि पहले चरण में केवल 139 नाम ही वापस जोड़े गए थे, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठे थे।
7 जिलों की 142 सीटों पर चुनाव
दूसरे चरण में 7 जिलों की 142 सीटों पर मतदान होना है। इनमें नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, हुगली, हावड़ा, नदिया, पूर्वी बर्दवान और कोलकाता शामिल हैं।
जिलावार आंकड़े चौंकाने वाले
जिलों के आंकड़ों के अनुसार, नॉर्थ 24 परगना में सबसे ज्यादा 3.25 लाख वोटर्स के नाम हटाए गए। इसके बाद साउथ 24 परगना (2.22 लाख), पूर्वी बर्दवान (2.09 लाख) और नदिया (2.08 लाख) का नंबर आता है। हावड़ा और हुगली में भी एक-एक लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं।
मतुआ बहुल इलाकों में भी असर
मेटियाब्रुज, राजारहाट-न्यू टाउन और रानाघाट जैसे क्षेत्रों में हजारों वोटर्स के नाम हटाए गए हैं। खासकर मतुआ बहुल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नाम कटने से चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
चुनाव आयोग और प्रशासन अलर्ट
बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिलने वाले वोटर्स को मतदान का मौका दिया जाएगा। वहीं, प्रशासन ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।











