CG NEWS: रायगढ़: तमनार में ‘सूखा’ या सुशासन का नया प्रयोग? बंद पड़ी शराब भट्टी ने बढ़ाया ‘पियक्कड़ों’ का बीपी!…

Sanjay Sahu

गौरीशंकर गुप्ता /रायगढ़:  रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र मे अवैध शराब बनाने वाली एक बड़ी शराब भट्टी के ध्वस्त और बंद होने के बाद यहां के शराब प्रेमियों की नींद उड़ गई है।

CG NEWS:स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से भट्टी बंद हुई, शराब उपलब्धता घट गई और दाम बढ़ गए, जिससे नशेबाज “पियक्कड़” तनाव में दिखने लगे हैं। इसे लोग “सूखा” भी कह रहे हैं, तो कहीं इसे प्रशासन की सख्ती और सुशासन का नया प्रयोग भी बताया जा रहा है।

तमनार में भट्टी का ध्वंस

CG NEWS:तमनार थाना क्षेत्र में पहले से अवैध शराब बनाने वाली एक बड़ी भट्टी चल रही थी, जहां महुआ आदि कच्चे पदार्थों से हजारों लीटर शराब तैयार होती थी।

CG NEWS:पुलिस द्वारा “ऑपरेशन क्लीन” और बाद में “ऑपरेशन आघात” जैसी कार्रवाइयों के तहत जब इस भट्टी पर निशाना साधा गया तो न केवल भट्टी ध्वस्त कर दी गई, बल्कि कई लीटर अवैध शराब जब्त कर विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। इस चक्रवाती कार्रवाई ने ग्रामीण शराब बाजार को हिलाकर रख दिया, क्योंकि अब यह आसानी से मिलना मुश्किल हो गया।

CG NEWS:स्थानीय शराबी वर्ग का शिकायत यह है कि अब शराब दूर–दूर से लानी पड़ रही है, जिससे दाम बढ़ गए और शराब की उपलब्धता लगातार कम हो रही है।

CG NEWS:इसे लोग जोक में “सूखा” बता रहे हैं और कहते हैं कि जैसे सूखे में फसल मरती है वैसे ही अब शराब उनके लिए “सूख” गई है। दूसरी ओर, स्थानीय नेताओं और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह “सुशासन का नया प्रयोग” है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब के कारण होने वाली अपराध, घरेलू हिंसा और स्वास्थ्य संकट धीरे‑धीरे कम हो सकते हैं।

CG NEWS:स्थानीय डॉक्टरों और ग्रामीणों के अनुसार, शराब की अनियमित और बढ़ी कीमतों के बीच कई नशेबाजों में तनाव, गुस्सा और घुटन महसूस हो रही है, जो दिखावे में इसे “बीपी बढ़ने” का मजाक बता रहे हैं। लोग कहते हैं, “अब तो बंद भट्टी की वजह से हर शराबी का ब्लड प्रेशर खुद‑ब‑खुद बढ़ गया है।

” इस टिप्पणी के पीछे वास्तविक चिंता भी झलकती है कि यदि नियमित और कानूनी तरीके से शराब नहीं मिली तो ये लोग अवैध रूप से मिलने वाली खराब शराब की तरफ भागेंगे, जो स्वास्थ्य के लिए और भी खतरनाक हो सकती है।

CG NEWS:अब तमनार में सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह “सूखा” सिर्फ शराबी वर्ग के लिए दिक्कत बनेगा या गांव‑स्तर पर नशामुक्ति और सुरक्षित वातावरण की नई शुरुआत का संकेत देगा—यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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