Sunday, September 6, 2026
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M.P News : कृषि मेले में जाने से रोके गए जीतू पटवारी! सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि उन्हें विदिशा में आयोजित कृषि मेले में शामिल होने से रोका जा रहा है। भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि प्रशासन से अनुमति मांगने के बावजूद उन्हें स्पष्ट मंजूरी नहीं दी गई।

‘कृषि कल्याण वर्ष’ पर उठाए सवाल

पटवारी ने सरकार के ‘कृषि कल्याण वर्ष’ मनाने के दावे पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि एक ओर सरकार किसानों के हितों की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर किसान के बेटे को ही कृषि मेले में जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने तीखे अंदाज में पूछा कि आखिर सरकार को डर किस बात का है।

MSP और गेहूं खरीदी का मुद्दा

कांग्रेस नेता ने विदिशा दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि किसानों ने गेहूं खरीदी को लेकर गंभीर समस्याएं बताईं। उनके अनुसार, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर समय पर खरीदी नहीं होने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने दावा किया कि करीब 20 लाख क्विंटल गेहूं किसानों को 2000 रुपए से कम दाम पर बेचना पड़ा, जबकि वर्तमान में मंडियों में यही गेहूं 2200 से 2300 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 400 से 500 रुपए तक का नुकसान हो रहा है।
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सुरक्षा या सियासत?

पटवारी ने यह भी कहा कि वे बिना किसी भीड़-भाड़ के अकेले मेले में जाना चाहते थे, ताकि नई कृषि तकनीकों को समझकर किसानों तक पहुंचा सकें। इसके बावजूद मेले स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव करार देते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

बड़े नेताओं की मौजूदगी से बढ़ा महत्व

विदिशा में आयोजित इस कृषि मेले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी इसे और महत्वपूर्ण बना रही है। ऐसे में पटवारी को रोके जाने का मुद्दा और अधिक तूल पकड़ता दिख रहा है।

उठते सवाल, गरमाती सियासत

इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश में सियासी माहौल गरमा गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार विपक्ष की मौजूदगी से असहज है या फिर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का हवाला सही है। फिलहाल यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

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