निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश में अब 15 साल से अधिक पुरानी कमर्शियल बसें सड़कों पर नहीं चल सकेंगी। इस मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए उस पर मुहर लगा दी है। सरकार द्वारा नवंबर 2025 में जारी आदेश को चुनौती देने वाली बस ऑपरेटरों की सभी याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। इसके बाद अब प्रदेशभर में ऐसी 899 बसों को हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
सरकार के अधिकार पर कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच में हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार को परिवहन नीति से जुड़े फैसले लेने का पूर्ण अधिकार है। यह निर्णय 27 फरवरी 2026 को सुरक्षित रखा गया था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है।
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ऑपरेटरों की दलीलें नहीं आईं काम
बस ऑपरेटरों ने कोर्ट में दलील दी थी कि उनके पास वैध स्टेज कैरिज परमिट है और उन्होंने समय-समय पर इसका नवीनीकरण भी कराया है। उनका कहना था कि जब उन्होंने परमिट लिया था, तब 15 साल की सीमा लागू नहीं थी, इसलिए नया नियम पुराने परमिट पर लागू नहीं होना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण पर जोर
सरकार का मानना है कि पुराने वाहन सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं और प्रदूषण भी बढ़ाते हैं। ऐसे में यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और यातायात सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
किन क्षेत्रों पर ज्यादा असर
जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में सबसे ज्यादा पुरानी और खटारा बसें जबलपुर क्षेत्र में हैं, जबकि रीवा संभाग में इनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में इस फैसले का सबसे ज्यादा असर जबलपुर क्षेत्र में देखने को मिलेगा।
जल्द शुरू होगी कार्रवाई
हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब परिवहन विभाग जल्द ही 15 साल से अधिक पुरानी बसों को सड़कों से हटाने की कार्रवाई शुरू करेगा। इससे बस ऑपरेटरों को बड़ा झटका लगा है, वहीं यात्रियों के लिए सुरक्षित और बेहतर परिवहन व्यवस्था की उम्मीद बढ़ गई है।











