नई दिल्ली| भारत के निर्यातकों के लिए एक बड़े झटके के रूप में, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त टैरिफ की अधिसूचना जारी की गई है, जो 27 अगस्त 2025 से लागू होगी। इसके साथ ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ की कुल दर 50% हो जाएगी।
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इस गंभीर आर्थिक स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार शाम एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें वाणिज्य, वित्त मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी और मंत्रिगण शामिल हुए। बैठक में अमेरिकी टैरिफ का जवाब देने, निर्यातकों को राहत पहुंचाने, वैकल्पिक बाजार खोजने और रोजगार प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता पैकेज पर विचार-विमर्श हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार, नए टैरिफ का असर भारत के 55% से अधिक उत्पाद क्षेत्रों पर पड़ेगा, जिनमें कपड़ा, आभूषण, चमड़ा, खिलौने, रसायन, मरीन उत्पाद आदि शामिल हैं। इनमें से कई क्षेत्रों में देश की बड़ी आबादी को रोजगार मिला हुआ है। टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी बाजारों में इन उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षीण हो जाएगी।
सरकार के संभावित कदम:
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निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज
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वैकल्पिक बाजारों की तलाश
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ट्रेड डील पर अमेरिका से फिर बातचीत
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आगामी जापान और चीन दौरे में आर्थिक सहयोग पर फोकस
क्या है आगे की राह?
जानकार मानते हैं कि राहत के दो ही रास्ते हैं:
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अमेरिका यदि रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान के बाद भारत पर टैरिफ कम करे
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भारत-अमेरिका के बीच एक प्रभावी ट्रेड डील
फिलहाल अक्टूबर 2025 तक दोनों देशों के बीच समझौते की डेडलाइन तय है, लेकिन प्रक्रिया जटिल मुद्दों में उलझी हुई है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा है कि संवाद जारी है, भले ही अमेरिकी टीम भारत न पहुंची हो।
टैरिफ का असल असर कब दिखेगा?
45.5 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित हो सकता है। हालांकि जरूरी दवाएं और सेमीकंडक्टर जैसे उत्पाद फिलहाल जीरो टैरिफ प्रावधानों के तहत सुरक्षित हैं। सितंबर 2025 से निर्यात आंकड़ों में असर दिखने की संभावना है।
अमेरिकी आयातकों और भारतीय निर्यातकों ने दिवाली और क्रिसमस के मद्देनजर पहले से स्टॉकिंग कर फ्रंटलोडिंग का प्रयास किया है, लेकिन अगर टैरिफ में राहत नहीं मिलती, तो 2026 की गर्मियों में भारी असर देखा जा सकता है।













