Zero Balance Revolution : मिनिमम बैलेंस झंझट खत्म! सरकारी बैंकों ने हटाया जुर्माना, चिदंबरम बोले- ‘जनता को लूटा गया

Parivesh
P-Chitambream

Zero Balance Revolution : नई दिल्ली। सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाला जुर्माना अब बीते दिनों की बात होने जा रही है। देश के प्रमुख सरकारी बैंकों – SBI, PNB, BOB, इंडियन बैंक और केनरा बैंक – ने इस पेनल्टी को समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। इसका सीधा फायदा उन करोड़ों खाताधारकों को मिलेगा जो न्यूनतम राशि रखने की बाध्यता के कारण आर्थिक रूप से परेशान रहते थे।

Zero Balance Revolution पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने इस फैसले का खुले शब्दों में स्वागत किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “X” पर लिखा:

P Chidambaram
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“बैंकों ने पिछले वर्षों में मिनिमम बैलेंस के नाम पर आम जनता से कई करोड़ रुपये की वसूली की। यह एक अनुचित व्यवस्था थी, जिससे सबसे ज़्यादा असर गरीब और ग्रामीण ग्राहकों पर पड़ा। यह निर्णय देर से लिया गया, लेकिन सही है।”

चिदंबरम ने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों से सेविंग अकाउंट धारक इस नियम के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे और इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग कर रहे थे, लेकिन बैंकों ने बार-बार इन शिकायतों की अनदेखी की।

क्या है मिनिमम बैलेंस का नियम?
अब तक अधिकतर बैंकों में ग्राहकों को अपने सेविंग अकाउंट में एक तय न्यूनतम राशि बनाए रखना जरूरी होता था। अगर बैलेंस इससे नीचे जाता, तो ग्राहक से मंथली जुर्माना वसूला जाता था, जो 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक हो सकता था। यह व्यवस्था ग्रामीण, छात्रों और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए विशेष रूप से बोझिल बन चुकी थी।

किन बैंकों ने हटाया जुर्माना?

  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI)
  • पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
  • बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB)
  • इंडियन बैंक
  • केनरा बैंक

इन बैंकों ने अब सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस मेंटेन न करने पर कोई चार्ज नहीं लगाने का निर्णय लिया है। इसका सीधा अर्थ है कि ग्राहक अपने खाते में जितनी चाहे उतनी राशि रख सकते हैं – जुर्माने की कोई चिंता नहीं।

आम लोगों को बड़ी राहत
इस फैसले के बाद अब करोड़ों ग्राहकों को अपने खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की चिंता से मुक्ति मिलेगी। खासकर रोज़मर्रा की कमाई पर जीने वाले, ग्रामीण क्षेत्र के ग्राहक, स्टूडेंट्स और सीनियर सिटिज़न्स को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।

क्या कहते हैं बैंकिंग एक्सपर्ट
बैंकिंग सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ये कदम बैंकिंग को और अधिक समावेशी (inclusive) बनाने की दिशा में एक अहम बदलाव है। साथ ही यह डिजिटलीकरण को भी बढ़ावा देगा, क्योंकि अब ज्यादा से ज्यादा लोग बैंकिंग सेवाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे। बैंकों का यह फैसला एक लंबे समय से चली आ रही जनता की मांग पर आधारित है और इससे वित्तीय समावेशन (financial inclusion) को बल मिलेगा। पी चिदंबरम जैसे वरिष्ठ नेता का समर्थन इसे राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना देता है।

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