Sunday, August 16, 2026
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Uttarakhand News: बाढ़-भूस्खलन में तबाही, 48 मौतें… उत्तराखंड में 4 साल का सबसे खराब मानसून, 66 में से 43 दिन रहे आपदाग्रस्त

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Uttarakhand News: नई दिल्ली: उत्तराखंड इस साल चार साल के सबसे खराब मानसून का सामना कर रहा है। 1 जून से 5 अगस्त 2025 के बीच 66 दिनों में से 43 दिन अत्यधिक मौसम (भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन) के रहे, जो पिछले चार वर्षों में सबसे ज्यादा है। यह आंकड़ा डाउन टू अर्थ (DTE) और दिल्ली के सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के विश्लेषण पर आधारित है।

Uttarakhand News: इस बार मानसून में अब तक 65% समय अत्यधिक मौसम देखने को मिला है, जबकि 2022 में यह 33%, 2023 में 47% और 2024 में 59% था। मानसून 1 जून से 30 सितंबर तक 122 दिनों का होता है और 5 अगस्त तक आधा समय बीत चुका है। सिर्फ 43 दिन में ही यह आंकड़ा 2022 के पूरे सीजन (44 दिन) के बराबर पहुंच गया है। अगर यही रफ्तार रही तो शेष 56 दिनों में और 40 से 43 दिन अत्यधिक मौसम के हो सकते हैं, जिससे कुल संख्या 83 से 86 दिन तक पहुंच जाएगी और यह पिछले चार साल का रिकॉर्ड तोड़ देगा।

Uttarakhand News: अब तक इस खराब मौसम ने भारी नुकसान किया है। 1 जून से 5 अगस्त 2025 के बीच कम से कम 48 लोगों की मौत हुई है। यह 2022 के पूरे सीजन की 56 मौतों का 86% और 2023 की 104 मौतों का करीब 46% है। खतरा अभी टला नहीं है। 5 अगस्त को उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में आई बाढ़ में 4 लोगों की मौत हुई और 100 से ज्यादा लोग लापता हैं।

Uttarakhand News:उत्तराखंड सरकार ने इस बाढ़ को क्लाउडबर्स्ट बताया, लेकिन भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह तकनीकी रूप से क्लाउडबर्स्ट नहीं था। क्लाउडबर्स्ट का मतलब है एक घंटे में 10 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश होना, जबकि धराली में कई घंटों तक लगातार भारी बारिश हुई। मौसम वैज्ञानिक अक्षय देओरस के अनुसार, 5-6 अगस्त के बीच उत्तरकाशी में औसत से 421% ज्यादा बारिश दर्ज की गई। सात घंटों में 100 मिमी से ज्यादा और आसपास के इलाकों में 400 मिमी से अधिक बारिश हुई, जो लंदन हेथ्रो के सालाना औसत का लगभग दो-तिहाई है।

Uttarakhand News: वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन इसका बड़ा कारण है। IMD के मुताबिक, 2024 का मानसून उत्तराखंड में 1901 के बाद का सबसे गर्म रहा, जिसमें औसत तापमान सामान्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। जून 2024 में अधिकतम तापमान 3.8 डिग्री और न्यूनतम 1.8 डिग्री ऊपर रहा। गर्म हवा अधिक नमी सोखती है, जिससे बारिश अधिक तेज और खतरनाक होती है। देओरस के अनुसार, गर्म और नम हवा के पहाड़ों से टकराने पर भारी बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बन रही है।

Uttarakhand News:हालांकि जलवायु परिवर्तन एक बड़ी वजह है, लेकिन तैयारी की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है। रियल-टाइम मौसम निगरानी और प्रभावी चेतावनी प्रणाली की कमी से हालात बिगड़ रहे हैं। 2014 से उत्तराखंड में तेज बुनियादी ढांचा विकास हुआ है, जो कई बार पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। हिमालयी क्षेत्र अनुसंधान संघ के संस्थापक शेखर पाठक का कहना है कि पिछले दशक में बेतरतीब निर्माण, जंगलों की कटाई और जल निकासी व्यवस्था बिगड़ने से आपदाओं का खतरा बढ़ा है।

Uttarakhand News: धराली की घटना हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते संकट का हिस्सा है। पिछले तीन सालों में 13 हिमालयी राज्यों में 70% मानसून दिन अत्यधिक मौसम के रहे हैं। यह स्थिति सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है।

Uttarakhand News: भारतीय सेना राहत और बचाव कार्य में जुटी है। उत्तरकाशी में बाढ़ और भूस्खलन से फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना के जवान दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। हेलिकॉप्टर और बचाव टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रही हैं, लेकिन लगातार बारिश और टूटी सड़कों से काम में कठिनाई हो रही है।

Uttarakhand News: विशेषज्ञों का कहना है कि तत्काल कदम उठाना जरूरी है। बेहतर मौसम निगरानी, समय पर चेतावनी तंत्र और अनियंत्रित निर्माण पर रोक लगानी होगी। पहाड़ों की पारिस्थितिकी बचाने के लिए वनीकरण और जल संरक्षण पर जोर देना होगा।

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