TS Singhdev : रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने सरगुजा की रामगढ़ पहाड़ियों के संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को छह पन्नों का पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि रामगढ़ की पहाड़ियाँ न केवल पुरातात्विक महत्व रखती हैं, बल्कि इन्हें माता सीता और भगवान राम के निवास के रूप में भी माना जाता है।
TS Singhdev : टीएस सिंहदेव ने पत्र में बताया कि रामगढ़ पहाड़ियों का **प्राकृतिक, धार्मिक, पुरातात्विक और सामाजिक महत्व** है। लाखों श्रद्धालु यहां राम-सीता-लक्ष्मण के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन मानव हस्तक्षेप के कारण पहाड़ियों में लगातार संकट बढ़ रहा है। चट्टानें ढह रही हैं और खनन तेजी से हो रहा है। उन्होंने चेताया कि एक बार नुकसान होने पर इसे सुधारना संभव नहीं होगा।
TS Singhdev : पूर्व उप मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कांग्रेस सरकार के समय खनन कार्य को रोका गया था। हाल ही में डीएफओ ने दो अलग-अलग आदेश जारी किए, जिनमें पहाड़ियों के कोऑर्डिनेट्स भी अलग बताए गए। एनजीटी और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने इस क्षेत्र को नो-गो एरिया घोषित करने की सिफारिश की थी। पहाड़ के संरक्षण और संवर्धन के लिए पहले ही समिति का गठन किया गया है।
रामगढ़ की पहाड़ी विवाद – पूरी कहानी आसान भाषा में
1. पहाड़ी का महत्व
छत्तीसगढ़ के सुरजपुर जिले में रामगढ़ की पहाड़ी है।
यह जगह कबीरदास जी और पंथ परंपरा से जुड़ी मानी जाती है।
स्थानीय आदिवासी समुदाय इसे धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर मानते हैं।
2. विवाद कैसे शुरू हुआ
रामगढ़ पहाड़ी के नीचे कोयले के बड़े भंडार हैं।
सरकार ने यहाँ खनन की अनुमति दी, और खनन का ठेका अडाणी समूह की कंपनी को मिला।
इसके बाद स्थानीय लोग और कबीरपंथी समाज ने विरोध शुरू किया।
3. स्थानीय आंदोलन
गाँवों के लोग कहते हैं कि खनन से उनकी जमीन, जंगल, पानी और धार्मिक स्थल नष्ट हो जाएंगे।
आदिवासी समुदाय और कबीरपंथी साधु–संतों ने धरना–प्रदर्शन, रैली और जनजागरूकता अभियान चलाया।
कई बार पुलिस और ग्रामीणों के बीच टकराव की खबरें भी आईं।
4. सरकार और कंपनी का पक्ष
सरकार और कंपनी का कहना है कि:
यहाँ खनन से रोज़गार के मौके मिलेंगे।
राज्य को राजस्व मिलेगा।
विकास कार्यों के लिए पैसा आएगा।
5. पर्यावरणीय पहलू
यह इलाका जंगलों से घिरा हुआ है, जहाँ हाथी और अन्य वन्यजीव रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि खनन से:
पर्यावरण को नुकसान होगा।
पानी के स्रोत सूख सकते हैं।
प्रदूषण बढ़ेगा।
6. कोर्ट का दखल
इस मामले को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाएँ पहुँची हैं।
कोर्ट ने सरकार और कंपनी से पर्यावरणीय मंजूरी और कागज़ात पूरे करने को कहा।
फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है, और अभी कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।
7. यह मुद्दा क्यों चर्चा में है?
धार्मिक आस्था (कबीरपंथियों की पवित्र जगह) बनाम विकास (खनन से उद्योग और रोज़गार) का टकराव है।
अडाणी समूह का नाम जुड़ने से यह राष्ट्रीय मीडिया में भी हाईलाइट हो गया है।
राजनीति भी गरम है – विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है कि उसने आस्था और आदिवासियों की अनदेखी की है।















