रिपोर्ट : राजेश व्यासउज्जैन, मध्यप्रदेश, 7 सितंबर। उज्जैन में आज साल का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण लगेगा। यह खगोलीय घटना रात 10:58 बजे शुरू होगी और सुबह 1:26 बजे समाप्त होगी। ग्रहण की मध्य स्थिति रात 11:41 बजे होगी, जब चंद्रमा का लगभग 136.8 प्रतिशत भाग पृथ्वी की छाया में ढका दिखाई देगा। इस साल पहले चंद्रग्रहण का अवसर 14 मार्च को आया था, लेकिन वह भारत में दिखाई नहीं दिया।
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ग्रहण के दौरान उज्जैन के प्रमुख मंदिरों में आरती और दर्शन की समय-सारिणी में बदलाव किए गए हैं। महाकाल मंदिर में शयन आरती का समय रात 10:30 बजे से एक घंटा पहले किया गया है। मंगलनाथ मंदिर में भात पूजन नहीं होगा, जबकि हरसिद्धि मंदिर में मूर्ति स्पर्श पर रोक रहेगी। नलखेड़ा में मां बगलामुखी के दर्शन और पूजा-अर्चना पूरी तरह बंद रहेंगी।
सलकनपुर के विजासन माता मंदिर में भी पट बंद कर दिए जाएंगे। सभी धार्मिक अनुष्ठान और पूजा 8 सितंबर को प्रातः मंगला आरती के बाद ही शुरू होंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है।
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जिवाजी वैधशाला के अधीक्षक राजेंद्र गुप्त ने बताया कि यह एक पूर्ण चंद्रग्रहण है, जिसे पूरी तरह देखा जा सकेगा। उन्होंने लोगों से ग्रहण के दौरान मंदिरों में धैर्य और अनुशासन बनाए रखने का आग्रह किया है।
खगोलविदों के अनुसार, चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा का अधिकांश भाग पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा। ऐसे अवसर पर विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करना शुभ माना जाता है। ग्रहण के समय मंदिरों में भीड़ के चलते प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
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उज्जैनवासियों के लिए यह खगोलीय घटना एक दर्शन और धार्मिक उत्सव का अवसर है। श्रद्धालु ग्रहण के दौरान विशेष पूजा-अर्चना, आरती और व्रत करने की परंपरा निभाएंगे, जबकि प्रशासन ने मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य-सुरक्षा के उपाय किए हैं।











