Tag: Vandana Hospital Controversy

  • Singrauli Health News : सिंगरौली: जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों की साठगांठ से खुली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल; वंदना हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप

    Singrauli Health News : सिंगरौली: जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों की साठगांठ से खुली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल; वंदना हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप

    Singrauli Health News : सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। जिला चिकित्सालय और ट्रामा सेंटर से मरीजों को लगातार निजी अस्पतालों की ओर रेफर करने का एक ऐसा खेल चल रहा है, जिसने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। इस पूरे मामले में ‘वंदना हॉस्पिटल’ का नाम सबसे प्रमुखता से उभर कर सामने आ रहा है। स्थानीय चौक-चौराहों पर चर्चा है कि सरकारी सेवा में तैनात कुछ डॉक्टर अपनी निजी प्रैक्टिस और आर्थिक लाभ के लिए मरीजों को ट्रामा सेंटर से सीधे प्राइवेट अस्पतालों की ओर मोड़ रहे हैं।

    नियम ताक पर, वंदना हॉस्पिटल में अव्यवस्थाओं का अंबार आरोप है कि वंदना हॉस्पिटल का संचालन पूरी तरह नियम-कानूनों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। अस्पताल में न तो वाहनों के लिए पार्किंग की कोई ठोस व्यवस्था है और न ही एंबुलेंस के आवागमन के लिए सुरक्षित रास्ता। अस्पताल के बाहर सड़क पर बेतरतीब खड़े वाहनों के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। सुविधाओं के अभाव के बावजूद यहाँ मरीजों की बढ़ती संख्या कई तरह के संदेह पैदा कर रही है।

    आयुष्मान योजना में सेंधमारी और ‘लूट’ का आरोप मामला तब और संगीन हो गया जब आयुष्मान भारत योजना में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं। एक पीड़ित मरीज ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए बताया कि उसका पर्चा जिला चिकित्सालय में काटा गया, लेकिन इलाज के लिए उसे वंदना हॉस्पिटल भेज दिया गया। निःशुल्क इलाज का वादा करने वाली इस सरकारी योजना के बावजूद मरीज से हजारों रुपये वसूल लिए गए। इसके अलावा, सूत्रों का दावा है कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों को महंगी दवाइयां बाहर से खरीदने पर मजबूर करता है और आयुष्मान के तहत मिलने वाली दवाओं का पूरा लाभ मरीजों को नहीं दिया जा रहा।

    प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल इन तमाम अव्यवस्थाओं और कथित “लूट” के बीच स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की चुप्पी संदेह पैदा करती है। जनता सवाल पूछ रही है कि क्या यह सब मिलीभगत का परिणाम है? यदि विभाग निष्पक्ष जांच कराए, तो कई बड़े चेहरों की संलिप्तता सामने आ सकती है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कब इस ‘कमीशनखोरी’ के नेटवर्क को तोड़ता है और गरीब मरीजों को सरकारी सुविधाओं का वास्तविक लाभ मिल पाता है।