इंदौर। Nishaanebaz.com-Indore Cyber Fraud Mule Account Scam: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के एरोड्रम थाना पुलिस ने राज्य पुलिस मुख्यालय (PHQ) द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ के तहत साइबर अपराधियों पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। पुलिस ने क्रिप्टो करेंसी में भारी मुनाफे का लालच देकर और फर्जी ‘म्यूल अकाउंट्स’ का इस्तेमाल कर देश भर में करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। दो अलग-अलग मामलों में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 16 आरोपियों को दबोचा है, जिनके पास से भारी मात्रा में चेकबुक, एटीएम कार्ड और नकद राशि बरामद की गई है।
क्रिप्टो करेंसी के नाम पर 17.84 लाख की ठगी, 10 आरोपी गिरफ्तार
पहले मामले में पीड़ित नितेश ने 1930 हेल्पलाइन और एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल पर क्रिप्टो करेंसी निवेश के नाम पर 17 लाख 84 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। एरोड्रम पुलिस ने वित्तीय ट्रेल की जांच करते हुए म्यूल खातों के माध्यम से धोखाधड़ी करने वाले 10 आरोपियों—संदीप सिसोदिया, सन्नी जाटव, आलोक द्विवेदी, भावेश पारगी, आदित्य पाण्डेय, साहिल पंवार, नितेश खेड़ेकर, जयवर्धन भदौरिया, प्रदीप लोधी और राजेन्द्र सिंह राजपूत को गिरफ्तार किया। इनमें से 7 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि 3 आरोपी 7 दिन के पुलिस रिमांड पर हैं।
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म्यूल अकाउंट गिरोह का मास्टरमाइंड हर्ष गिरफ्तार, खातों में मिला 3.60 करोड़ का ट्रांजेक्शन
दूसरे मामले में एरोड्रम थाने में दर्ज 1.44 लाख रुपये की ठगी की जांच के दौरान सूरज जेसवाल और अमन चौहान के बैंक खाते संदिग्ध पाए गए। सूरज के खाते में 3.42 करोड़ रुपये और अमन के खाते में 17.5 लाख रुपये का लेन-देन मिला। पुलिस ने एमआईजी (MIG) इलाके में दबिश देकर गिरोह के मास्टरमाइंड हर्ष सहित सूरज जेसवाल, संदीप, उमन, हरिओम और आयुष को दबोच लिया, जबकि अमन चौहान फरार है। यह गिरोह मात्र 4 से 5 हजार रुपये किराए पर लोगों के बैंक खाते, एटीएम, चेकबुक और सिम कार्ड लेकर साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल करता था।
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देशभर में दर्ज हैं 200 एफआईआर, पुलिस ने लगाई संगठित अपराध की धारा 112 BNS
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 34 एटीएम कार्ड, 12 पासबुक, 24 चेकबुक, 8 मोबाइल, 1 वाई-फाई राउटर, डायरी और 1.08 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। जांच में सामने आया है कि इन खातों के खिलाफ देशभर में करीब 200 एफआईआर दर्ज हैं। इंदौर डीसीपी नरेंद्र रावत ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112 (संगठित अपराध) बढ़ाई गई है। अब पुलिस वित्तीय नेटवर्क, बैंकिंग तंत्र के कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत और मुख्य सरगनाओं की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।






