Swami Avimukteshwaranand Controversy : भोपाल: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को राजधानी भोपाल में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। सिंह ने हाल ही में प्रयागराज माघ मेले और अन्य स्थानों पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए प्रशासनिक व्यवहार पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरुओं का अपमान और अन्याय करार दिया।
शंकराचार्य के प्रति ‘अन्याय’ का मुद्दा: दिग्विजय सिंह ने कहा कि शंकराचार्य जैसे पूज्य संतों को उनकी धार्मिक गतिविधियों और स्नान से रोकना प्रशासन की तानाशाही को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी सत्ता के सुर में सुर नहीं मिलाता, उसे प्रताड़ित किया जाता है। सिंह ने पूछा कि “क्या अब देश के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री यह तय करेंगे कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं?”
RSS के हिंदू सम्मेलनों पर पलटवार: संघ द्वारा गांव-गांव में आयोजित किए जा रहे ‘हिंदू सम्मेलनों’ पर टिप्पणी करते हुए दिग्विजय सिंह ने इसे ध्रुवीकरण की राजनीति बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सम्मेलनों का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “आरएसएस एक अपंजीकृत संस्था है जिसका मुख्य काम नफरत फैलाना है। ये सम्मेलन केवल चुनावी फायदे के लिए हिंदुओं को भड़काने की कोशिश हैं।”
बेबाक बयानों का दौर: दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वे संघ की विचारधारा के कट्टर विरोधी हैं क्योंकि वह संविधान को नहीं मानती। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह धर्म का उपयोग केवल वोट बैंक के लिए कर रही है, जबकि वास्तविक धार्मिक मूल्यों और संतों का निरादर किया जा रहा है।
“शंकराचार्य जी के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, वह निंदनीय है। आरएसएस के ये हिंदू सम्मेलन समाज में वैमनस्यता फैलाने के लिए हैं। मैं उनकी सांगठनिक क्षमता का सम्मान कर सकता हूँ, लेकिन उनकी नफरत वाली विचारधारा का विरोध हमेशा करता रहूँगा। ये लोग धर्म की आड़ में राजनीति कर रहे हैं।”













