Supreme Court का Indigo फ्लाइट संकट में हस्तक्षेप से साफ़ इंकार, बोले CJI- रकार देख रही

Rahul Goshwami
सुप्रीम कोर्ट ने इंडिगो संकट में हस्तक्षेप से किया इंकार

नई दिल्ली : नई दिल्ली: देशभर में पिछले 7 दिनों से इंडिगो एयरलाइन की फ्लाइट्स लगातार कैंसिल हो रही हैं, जिससे हजारों यात्री प्रभावित हुए हैं। इस समस्या को लेकर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट इंडिगो संकट में हस्तक्षेप करे, प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और मुआवजा सुनिश्चित करे।

सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल दखल देने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि “अभी सरकार इस मामले में कदम उठा रही है। हालत जस के तस होती तो अलग बात थी। हम समझते हैं कि लाखों लोग इस समस्या का सामना कर रहे हैं, लेकिन सरकार मामले को देख रही है। उन्हें ही इसे संभालने दें।”

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PIL में क्या कहा गया
याचिकाकर्ता के वकील नरेंद्र मिश्रा ने कोर्ट में बताया कि:

  • 2,500 उड़ानें विलंबित हैं और 95 हवाई अड्डे प्रभावित हैं।
  • पायलटों के लिए बनाए गए नए FDTL (Flight Duty Time Limitation) नियमों के कारण इंडिगो की अधिकांश उड़ानें रद्द हो रही हैं।
  • उड़ानों के रद्द होने से यात्रियों को मानवीय संकट और अनुच्छेद 21 के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
  • याचिका में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की गई थी ताकि प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा और मुआवजा सुनिश्चित किया जा सके।

CJI से व्यक्तिगत मुलाकात
6 दिसंबर को याचिकाकर्ता के वकील सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी सूर्यकांत के घर पहुंचे और उनसे तत्काल सुनवाई की मांग की। इस दौरान उन्होंने बताया कि फ्लाइट कैंसिल होने और देरी से यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

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यात्रियों पर प्रभाव
इंडिगो संकट के कारण देशभर में यात्री परेशान हैं। कई लोग अपने जरूरी काम और यात्रा के कार्यक्रम बदलने को मजबूर हुए हैं। इसके अलावा, उड़ानों में विलंब और कैंसिल होने के कारण एयरलाइन टिकट की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है।विशेषज्ञों का कहना है कि FDTL नियमों और पायलटों की कमी के कारण इंडिगो संकट ने गंभीर रूप ले लिया है, और सरकार और एयरलाइन दोनों को मिलकर तुरंत समाधान निकालना आवश्यक है।

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