जशपुर ब्यूरो [Nishanebaaz News]। Jashpur Bagicha Hydro Power Survey Protest के तहत छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक अंतर्गत भट्ठीकोना क्षेत्र में प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के सर्वे को लेकर जनआक्रोश तेजी से भड़क उठा है। प्रस्तावित प्रोजेक्ट के विरोध में उतरे स्थानीय ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने से पहले सरकार के समक्ष अपनी शर्तें रख दी हैं।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि उनकी जमीनों का अधिग्रहण किया जाता है तो उन्हें मुआवजा स्वरूप तीन गुना जमीन दी जाए। मांगें पूरी न होने की स्थिति में ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
5 से 7 गांवों के अस्तित्व और आजीविका पर संकट
दरअसल, राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भट्ठीकोना क्षेत्र में हाइड्रो पावर की संभावनाओं का अध्ययन प्रस्तावित है। इसके तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) के माध्यम से केंद्र सरकार की तकनीकी एजेंसी WAPCOS द्वारा सर्वे का काम किया जाना है।
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प्रभावित क्षेत्र: ग्रामीणों के अनुसार, इस परियोजना की चपेट में आने से रौनी, बगीचा और भट्ठीकोना समेत लगभग 5 से 7 गांव बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
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आजीविका की चिंता: ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीन और सदियों पुरानी आजीविका को छीना जा रहा है। सरकार को पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, अधिकारों और भविष्य को लेकर एक पारदर्शी नीति बनानी चाहिए।
मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन का अल्टीमेटम
क्षेत्रीय ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि किसी भी सर्वे टीम या अधिकारी को बिना पूर्व सूचना और आम सहमति के गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी चिंताओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया और तीन गुना जमीन देने की मांग नहीं मानी गई, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
बगीचा SDM बोले- ग्रामीणों के बीच फैले भ्रम को दूर करेगा प्रशासन
मामले में बगीचा के एसडीएम समीर बड़ा ने आधिकारिक पक्ष रखते हुए कहा कि भट्ठीकोना क्षेत्र में रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही CSPGCL और WAPCOS द्वारा हाइड्रो पावर की संभावनाओं का शुरुआती अध्ययन और सर्वे प्रस्तावित है।
एसडीएम ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह केवल एक शुरुआती सर्वे है, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं। ग्रामीणों के बीच सर्वे के उद्देश्यों को लेकर कुछ भ्रम या असमंजस की स्थिति बन गई है। बहुत जल्द प्रशासनिक टीम ग्रामीणों के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करेगी और उनकी सभी शंकाओं व चिंताओं का नियमानुसार समाधान किया जाएगा।





