रीवा। Nishaanebaz.com-Rewa-Elderly-Arrest-Case: मध्य प्रदेश के रीवा जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र से पुलिस और शिकायतकर्ताओं की कथित साठगांठ का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पुरानी रंजिश का बदला लेने की नीयत से एक वृद्ध की बीमारी के कारण हुई स्वाभाविक मौत को सुनियोजित तरीके से हत्या का रूप देने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले से आहत पीड़ित परिजनों ने रीवा जोन के आईजी कार्यालय पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराए जाने और न्याय दिलाए जाने की गुहार लगाई है।
रीवा जोन के आईजी गौरव राजपूत के समक्ष शिकायत लेकर पहुंचे चतुर गौतम ने मीडिया और अधिकारियों को पूरी बात विस्तार से बताई। उन्होंने बताया कि डेली गांव निवासी दबल प्रसाद लंबे समय से मस्तिष्क और आंतों के बेहद गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे। उनका इलाज शहर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में डॉक्टर धीरेंद्र गौतम की देखरेख में लगातार चल रहा था। घटना की रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें विंध्या अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, दोपहर 2:55 बजे डॉक्टर के स्पष्ट और सख्त मना करने के बावजूद परिजन गंभीर हालत में मरीज को डिस्चार्ज करवाकर अन्यत्र ले जा रहे थे, रास्ते या अन्य जगह पहुंचते ही कुछ ही देर में उनकी मृत्यु हो गई।
मृतक की मौत के बाद पुरानी रंजिश का नापाक फायदा उठाने के लिए कथित तौर पर एक बड़ा षड्यंत्र रचा गया। सामने आए दस्तावेजों और समय की सटीक गणना (टाइमिंग) से इस कथित फर्जीवाड़े की पोल पूरी तरह खुलती नजर आ रही है। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक मरीज को दोपहर 2:55 बजे डिस्चार्ज कराया गया था और उसके तुरंत बाद उनकी सांसें थम गईं। इसके बावजूद, महज कुछ ही घंटों के भीतर शाम 4:52 बजे बैकुंठपुर थाने में एक झूठी एफआईआर दर्ज करा दी गई।
दर्ज एफआईआर में यह मनगढ़ंत और झूठा उल्लेख किया गया कि मरीज का इलाज विंध्या अस्पताल में चल रहा था और कुएं से पानी भरने के मामूली विवाद को लेकर आरोपियों ने उसे बेरहमी से मुक्के मारे, जिससे उसे खून की उल्टी हुई और उसकी मौत हो गई। इसके विपरीत, निजी अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों की रिपोर्ट कुछ और ही सच्चाई बयां कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने साफ तौर पर उल्लेख किया था कि कई दिनों से पेचिश और गंभीर संक्रमण के चलते मरीज की शारीरिक स्थिति अत्यंत नाजुक हो चुकी थी और उन्हें बचाना असंभव था।
आरोप है कि बिना किसी ठोस चिकित्सीय अनुसंधान और जमीनी निष्पक्षता के, बैकुंठपुर थाना प्रभारी शृंगेस सिंह राजपूत ने बिना सोचे-समझे 74 वर्षीय देवराज शुक्ला और 71 वर्षीय भाईलाल शुक्ला के खिलाफ धारा 302 के तहत बेहद गंभीर अपराध पंजीबद्ध कर लिया। पुलिस ने भी बिना पूरी सच्चाई और दस्तावेजों की गहराई में जाए अगले ही दिन यानी 8 तारीख को दोनों बुजुर्गों को गिरफ्तार कर सीधे जेल भेज दिया।
पीड़ित परिवार ने पुलिस और शिकायतकर्ताओं की इस कथित मिलीभगत और मनमाने रवैये के खिलाफ उच्चाधिकारियों से कड़े शब्दों में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका सीधा कहना है कि पुरानी रंजिश के चलते दो बुजुर्गों का जीवन और सम्मान दांव पर लगा दिया गया है, और इस पूरी प्रक्रिया में लिप्त लापरवाह पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए तथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।