दुर्ग/भिलाई [Nishanebaaz News]। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में चल रही संगीतमय शिव महापुराण कथा के चौथे दिन सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने व्यासपीठ से संस्कारों और राष्ट्र निर्माण को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। हाल ही में दिल्ली में हुए ‘जेन-जी’ (Gen-Z) प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर की गई गाली-गलौज और अभद्र भाषा पर गहरा दुख जताते हुए उन्होंने आज की युवा पीढ़ी के संस्कारों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
‘पीएम को अपशब्द कहना आज की जनरेशन के संस्कार नहीं’
कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिल्ली के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा:
“आज देखिए क्या हो रहा है? कहीं न कहीं हमारे बच्चे अपनी संस्कृति और संस्कारों से दूर हो रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले हमने दिल्ली का नजारा देखा था। क्या यही हमारे संस्कार हैं? भारत को विश्वगुरु बनाने की पहल करने वाले और विदेशों में भी जिस देश का डंका बज रहा है, जो हर सनातनी के दिल में निवास करते हैं—ऐसे संवैधानिक पद पर बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी को तुम अपशब्द कह रहे हो? क्या यह जेन-जी है? क्या इसे संस्कार कहेंगे?”
युवाओं को दिलाई देश की गरिमा और संस्कारों की शपथ
कथा स्थल पर मौजूद हजारों श्रद्धालुओं के बीच पंडित प्रदीप मिश्रा ने वहां उपस्थित जेन-जी (युवा लड़कों और लड़कियों) को अपनी जगह पर खड़ा करवाया। उन्होंने व्यासपीठ से सभी युवाओं को देश की मर्यादा, संस्कृति और संस्कारों को बनाए रखने की शपथ दिलाई। इस दौरान युवाओं द्वारा हाथ उठाकर ली गई शपथ की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
“बच्चों को कार नहीं, संस्कार दें” — अभिभावकों से अपील
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा सुनने आए माता-पिता और अभिभावकों को विशेष सलाह देते हुए कहा कि वे बच्चों को कम उम्र में महंगी गाड़ियां या कारें दिलाने के बजाय अच्छे संस्कार दें। उन्होंने कहा, “यदि आप अपने बच्चों को सही संस्कार देंगे, तो वे खुद अपनी मेहनत से कारों की लंबी लाइन लगा देंगे।”
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में ‘मंत्र पाठ’ की पहल की सराहना
कथावाचक ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के स्कूलों में सुबह की प्रार्थना और ‘मंत्र पाठ’ अनिवार्य किए जाने के निर्णय की जमकर तारीफ की। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक और सनातनी पहल बताते हुए कहा कि जब आने वाली पीढ़ी बचपन से ही संस्कारों के सांचे में ढलेगी, तो उसके भीतर अपने देश और छत्तीसगढ़ राज्य के प्रति गर्व और सम्मान की भावना मजबूत होगी।





