Special Intensive Revision : नई दिल्ली | पटना/नई दिल्ली। बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के तहत चुनाव आयोग ने चौंकाने वाला आंकड़ा जारी किया है। राज्य में करीब 51 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने की संभावना जताई गई है। जांच में सामने आया है कि इनमें 18 लाख मतदाता मृत पाए गए हैं, 26 लाख लोग स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि 7.5 लाख से अधिक मतदाताओं ने दोहरी पंजीकरण करवा रखा है। यह कदम आयोग द्वारा वोटर लिस्ट को साफ और पारदर्शी बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।
97.30% मतदाताओं ने भर दिए फॉर्म
आयोग के अनुसार, बिहार के 7.89 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 97.30% लोगों ने अपने गणना फॉर्म (Enumeration Forms) जमा कर दिए हैं। यह प्रक्रिया 1 अगस्त को प्रकाशित होने वाली प्रारंभिक मतदाता सूची के लिए अनिवार्य है। सिर्फ 2.70% मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने अब तक फॉर्म नहीं भरा है। इस पूरे अभियान में 98,500 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और 1.5 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) लगे हुए हैं, जिससे यह प्रक्रिया व्यापक और समावेशी हो सके।
11,000 मतदाताओं का कोई अता-पता नहीं
21 जुलाई 2025 तक हुए घर-घर सर्वे में आयोग ने पाया कि 11,000 मतदाताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। यह भी दर्शाता है कि मतदाता सूची में कई नाम केवल कागजों में ही दर्ज हैं। 25 जुलाई तक सत्यापन, 1 अगस्त को प्रारंभिक सूची जिन मतदाताओं को मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट के तौर पर चिह्नित किया गया है, उनकी लिस्ट राजनीतिक दलों और उनके बूथ एजेंटों को दे दी गई है। इन्हें 25 जुलाई तक स्थिति की पुष्टि करनी होगी। इसके बाद, 1 अगस्त को प्रारंभिक वोटर लिस्ट प्रकाशित होगी और 1 सितंबर तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज की जा सकेंगी।
30 सितंबर को जारी होगी फाइनल वोटर लिस्ट
चुनाव आयोग ने बताया कि सभी सुधारों और आपत्तियों के निपटारे के बाद 30 सितंबर 2025 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिहीन और निष्पक्ष बनाना है, ताकि भविष्य के चुनावों में पारदर्शिता और विश्वास बना रहे।











