सिंगरौली: जिले की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष, जिनका नाम पहले एक कथित चिटफंड प्रकरण में सामने आ चुका है, अब सीड़ा (SIDA) अध्यक्ष पद की संभावित दावेदारी को लेकर सुर्खियों में बताए जा रहे हैं। इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम नागरिकों के बीच नई बहस छेड़ दी है।
सूत्रों के मुताबिक वर्षों पहले सामने आए आर्थिक अनियमितता से जुड़े मामले में निवेशकों की रकम डूबने की शिकायतें हुई थीं, जिसके बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी हुई। संबंधित नेता को उस समय कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत और बाद में जमानत का सामना करना पड़ा था। हालांकि मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ा, लेकिन उस प्रकरण ने उनकी सार्वजनिक छवि पर असर जरूर डाला।
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सीड़ा अध्यक्ष पद को लेकर बढ़ी हलचल
हाल के दिनों में यह चर्चा तेज है कि वही पूर्व जिलाध्यक्ष फिर से सक्रिय राजनीति में प्रभावशाली भूमिका पाने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि समर्थकों के जरिए माहौल तैयार करने की कवायद भी जारी है। इस संभावित दावेदारी को लेकर स्थानीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं—कुछ लोग इसे राजनीतिक पुनर्वापसी मान रहे हैं, तो कई नागरिक सवाल उठा रहे हैं।
क्यों अहम मानी जाती है यह कुर्सी
सीड़ा अध्यक्ष पद प्रशासनिक और विकासात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे भूमि विकास, परियोजनाओं की स्वीकृति और वित्तीय निर्णयों जैसे कई अधिकार जुड़े होते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पद स्थानीय सत्ता संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
चुप्पी से बढ़े कयास
अब तक इस विषय पर न तो आधिकारिक राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है और न ही प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता दी गई है। यही वजह है कि संभावित नियुक्ति को लेकर अटकलों का दौर जारी है।
यदि आने वाले समय में दावेदारी औपचारिक रूप लेती है, तो सिंगरौली की राजनीति में विरोध-समर्थन का दौर और तेज हो सकता है। फिलहाल जिले की नजरें आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।













