निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। दुर्गा अष्टमी से लेकर रामनवमी तक जिलेभर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन और भोज
महाअष्टमी के दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और कन्या पूजन का आयोजन किया। इस दौरान छोटी बालिकाओं को देवी स्वरूप मानकर उन्हें भोजन कराया गया और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया गया। नौ दिनों तक व्रत रखने वाले भक्तों ने पूरे नियम और श्रद्धा के साथ यह अनुष्ठान पूरा किया।
मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
नवरात्रि के दौरान जिले के मंदिरों में दिनभर पूजा-अर्चना और भक्ति कार्यक्रमों का दौर चलता रहा। सिंगरौली के साथ ही सीमावर्ती सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) स्थित ज्वालामुखी और मां कुण्डवासिनी देवी मंदिरों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
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‘जबारिय’ विसर्जन के साथ समापन
नवरात्रि के नौ दिनों तक स्थापित ‘जबारिय’ (जौ) को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। रामनवमी के दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों के साथ ‘जबारिय’ की शोभायात्रा निकाली और विधि-विधान से नदी में विसर्जन किया।
भक्ति और परंपरा का संगम
विसर्जन के दौरान भक्ति संगीत और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके बाद भव्य भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया।
परंपरा का महत्व
पंडा गोपाल दास शाह जी ने बताया कि ‘जबारिय’ को मां दुर्गा का प्रतीक मानकर नौ दिनों तक पूजा की जाती है। कन्या पूजन के माध्यम से देवी के रूप में बालिकाओं का सम्मान किया जाता है और रामनवमी पर विसर्जन के साथ इस पावन पर्व का समापन होता है।यह आयोजन सिंगरौली की समृद्ध धार्मिक परंपरा और लोगों की अटूट आस्था का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।











