Singrauli Public Toilet Closed : सिंगरौली। नगर परिषद बरगवां में स्वच्छता के दावे केवल सरकारी फाइलों तक ही सिमट कर रह गए हैं। हिंडाल्को मद से निर्मित सार्वजनिक शौचालय पिछले कई वर्षों से धूल फांक रहे हैं। जिस उद्देश्य से इन शौचालयों का निर्माण हुआ था, वह उद्देश्य दरवाजों पर लटकते तालों के पीछे कैद हो गया है।
अधिकारियों की चुप्पी और दिखावा: शौचालय के गेट पर लगा ताला नगर परिषद अध्यक्ष, सीएमओ और उपाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह शौचालय उपाध्यक्ष के कार्यालय/बिल्डिंग के ठीक पास स्थित है, फिर भी इसे चालू कराने की जहमत नहीं उठाई गई। ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि जब भी कोई उच्चाधिकारी निरीक्षण के लिए आता है, तो दिखावे के तौर पर ताला खोल दिया जाता है और उनके जाते ही फिर से बंद कर दिया जाता है।
महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक परेशान: शौचालय बंद होने का सबसे बुरा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। मजबूरी में उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है, जिससे न केवल उनकी सुरक्षा और गरिमा दांव पर लगी है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। “स्वच्छ भारत” के नाम पर करोड़ों खर्च करने के बावजूद बरगवां की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।
भ्रष्टाचार और लापरवाही की गवाही: नगर परिषद बरगवां में केवल शौचालय ही नहीं, बल्कि सड़कों पर बढ़ता अतिक्रमण और कचरे के ढेर भी प्रशासनिक विफलता को उजागर करते हैं। ग्रामीणों का आक्रोश है कि जनता के पैसों का दुरुपयोग कर निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन उसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी कभी इन तालों को स्थायी रूप से खोलने की हिम्मत दिखाएंगे या फिर यह केवल एक ‘शोपीस’ बनकर रह जाएगा?













