Dowry Harassment: दहेज प्रताड़ना की पीड़िता 6 माह के मासूम को गोद में लेकर घंटों बैठी रही, वन स्टॉप सेंटर में बयान दर्ज करने में देरी पर उठे सवाल

Anuj Nirala

Dowry Harassment: सिंगरौली। महिलाओं को त्वरित सहायता और न्याय दिलाने के उद्देश्य से संचालित वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाने वाली एक पीड़ित महिला अपने छह माह के मासूम बच्चे को गोद में लेकर बयान दर्ज कराने के लिए सुबह से शाम तक इंतजार करती रही। महिला का आरोप है कि वह सुबह करीब 10 बजे सेंटर पहुंची थी, लेकिन शाम करीब 4 बजे तक भी उसका बयान दर्ज नहीं किया गया। इस घटना ने महिला सहायता सेवाओं की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुबह 10 बजे पहुंची, शाम तक नहीं हुआ बयान दर्ज

पीड़िता अनिता शाह (20 वर्ष), निवासी ग्राम लंघाडोल, जिला सिंगरौली, का आरोप है कि वह अपने मामले में बयान दर्ज कराने के लिए वन स्टॉप सेंटर पहुंची थी। उसके अनुसार, कई घंटे तक इंतजार करने के बावजूद उसकी सुनवाई नहीं हुई, जबकि उसके बाद पहुंचे अन्य मामलों में कार्रवाई की जाती रही।महिला का कहना है कि वह पूरे समय अपने छह माह के दूधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर बैठी रही, लेकिन किसी अधिकारी ने उसकी तत्काल मदद नहीं की।

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दहेज के लिए प्रताड़ना के गंभीर आरोप

Dowry Harassment: पीड़िता ने अपने आवेदन में बताया कि उसका विवाह लगभग एक वर्ष पहले अजित कुमार शाह से हुआ था। विवाह के समय उसके मायके पक्ष ने मोटरसाइकिल, फर्नीचर, सोने की अंगूठी, ₹12 हजार नकद, बर्तन, कपड़े और अन्य घरेलू सामान दहेज के रूप में दिया था।

इसके बावजूद विवाह के बाद पति, सास और ससुर द्वारा कथित रूप से सोने की चेन, ₹50 हजार नकद और बुलेट मोटरसाइकिल की अतिरिक्त मांग की जाने लगी। महिला का आरोप है कि मांग पूरी नहीं होने पर उसके साथ लगातार गाली-गलौज, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की गई। कई बार उसे घर से निकाल दिया गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई।

पहले भी दर्ज करा चुकी है शिकायत

Dowry Harassment: महिला के अनुसार, 2 मई 2026 को उसके साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया गया था, जिसके बाद उसने लंघाडोल थाना में शिकायत दर्ज कराई। बाद में उसने महिला थाना बैढ़न में भी पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ शिकायत दी।

पीड़िता का कहना है कि समझौते के बाद भी प्रताड़ना बंद नहीं हुई। उसका आरोप है कि 18 जुलाई 2026 को फिर उसके साथ मारपीट की गई और ससुराल पक्ष ने उसके छह माह के बच्चे को उससे छीनने तथा जान से मारने की धमकी भी दी।

अधिकारी ने बताया- दूसरे मामले में थीं व्यस्त

Dowry Harassment: इस संबंध में वन स्टॉप सेंटर की संबंधित अधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उस समय वे दूसरे प्रकरण की कार्रवाई में व्यस्त थीं। इसी कारण पीड़िता का बयान तत्काल दर्ज नहीं किया जा सका।हालांकि, पीड़िता का कहना है कि यदि महिलाओं की सहायता के लिए बनाए गए केंद्रों में भी घंटों इंतजार करना पड़े, तो संकट की घड़ी में पीड़ितों को समय पर न्याय और सहायता कैसे मिलेगी।

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महिला सहायता व्यवस्था पर उठे सवाल

Dowry Harassment: यह मामला अब महिला सुरक्षा और सहायता तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। महिलाओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित वन स्टॉप सेंटर से अपेक्षा की जाती है कि घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और अन्य संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और पीड़िता को कब तक न्याय मिलता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। साथ ही, यह भी देखने वाली बात होगी कि बयान दर्ज करने में हुई कथित देरी की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है या नहीं।

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