मुंबई : हिंदी सिनेमा के प्रतिभाशाली अभिनेताओं में शुमार शाहिद कपूर आज 45 साल के हो गए हैं। 25 फरवरी 1981 को जन्मे शाहिद, अभिनेता पंकज कपूर और अभिनेत्री नीलिमा अजीम के बेटे हैं। साल 2003 में फिल्म ‘इश्क विश्क’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाले शाहिद ने जल्द ही ‘चॉकलेट बॉय’ के रूप में युवाओं के बीच खास पहचान बना ली।
शुरुआत में झटके, फिर संभला करियर
हालांकि डेब्यू फिल्म को औसत सफलता मिली, लेकिन इसके बाद उनकी लगातार कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं। ‘फिदा’, ‘दिल मांगे मोर’, ‘दीवाने हुए पागल’, ‘वाह! लाइफ हो तो ऐसी’ और ‘शिखर’ जैसी फिल्में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं। 2006 में आई ‘36 चाइना टाउन’ ने कुछ राहत दी, लेकिन असली मोड़ ‘विवाह’ से आया, जिसने शाहिद को पारिवारिक और गंभीर अभिनेता की पहचान दिलाई।
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‘जब वी मेट’ से बदली इमेज
इम्तियाज अली की फिल्म ‘जब वी मेट’ ने शाहिद कपूर को एक संजीदा और परिपक्व अभिनेता के रूप में स्थापित कर दिया। इसके बाद भी उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए। ‘फूल एन फाइनल’, ‘किस्मत कनेक्शन’, ‘दिल बोले हडिप्पा’, ‘चांस पे डांस’, ‘मौसम’, ‘शानदार’, ‘रंगून’, ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ और ‘जर्सी’ जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकीं।
‘कबीर सिंह’ से ऐतिहासिक वापसी
साल 2019 में रिलीज हुई ‘कबीर सिंह’ ने शाहिद कपूर के करियर को नई ऊंचाई दी। फिल्म ने 278 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर कई रिकॉर्ड बनाए। वहीं ‘पद्मावत’ और ‘उड़ता पंजाब’ में उनके अभिनय की खूब सराहना हुई।
‘ओ रोमियो’ में नया अवतार
इन दिनों शाहिद कपूर की फिल्म ‘ओ रोमियो’ सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है, जिसमें वे एक्शन अवतार में नजर आ रहे हैं। उनके साथ तृप्ति डिमरी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म को दर्शकों से मिश्रित प्रतिक्रिया मिल रही है।
हिट और फ्लॉप के इस लंबे सफर के बावजूद शाहिद कपूर ने खुद को एक बहुमुखी और समर्पित अभिनेता के रूप में स्थापित किया है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि असफलताओं के बावजूद निरंतर प्रयास सफलता का रास्ता बना सकते हैं।











