निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत मिल गई है। विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने यह राहत देते हुए लंबी न्यायिक हिरासत और ट्रायल में हो रही देरी को अहम आधार माना। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी उन्हें टेरर फंडिंग से जुड़े एक अन्य मामले में जमानत दे चुका है।
2019 में हुई थी गिरफ्तारी
शब्बीर शाह को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 4 जून 2019 को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के लिए कथित तौर पर फंड जुटाने से जुड़ा है। NIA ने अक्टूबर 2019 में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में भी उन्हें आरोपी बनाया था।
टेरर फंडिंग के गंभीर आरोप
शाह पर आरोप है कि उन्होंने हवाला नेटवर्क और LOC ट्रेड के जरिए धन जुटाने में भूमिका निभाई। यह धन कथित रूप से अलगाववादी गतिविधियों और मारे गए आतंकवादियों के परिवारों के नाम पर इस्तेमाल किया गया। मामले की जांच कई वर्षों से जारी है और अभी भी सुनवाई लंबित है।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि मुकदमा अपेक्षा से ज्यादा लंबा खिंच रहा है और आरोपी लंबे समय से जेल में है, जिसे ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सख्त शर्तों के साथ जमानत
अदालत ने जमानत देते हुए कई कड़ी शर्तें लगाई हैं। शब्बीर शाह बिना अनुमति दिल्ली से बाहर नहीं जा सकेंगे और उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा। इसके अलावा उन्हें नियमित अंतराल पर NIA के सामने पेश होकर रिपोर्ट करना होगा।
रिहाई की प्रक्रिया
पटियाला हाउस कोर्ट में बेल बॉन्ड भरने और सभी शर्तों का पालन करने के बाद ही उनकी रिहाई संभव होगी। हालांकि यदि किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी या वारंट लंबित है, तो रिहाई में देरी हो सकती है।











