Sehore Medical Negligence : सीहोर (भैरूंदा): सीहोर जिले के ग्राम सिंहपुर से एक ऐसी भयावह खबर सामने आई है, जो सरकारी अस्पतालों की संवेदनहीनता की चरम सीमा को दर्शाती है। यहाँ एक महिला की नसबंदी ऑपरेशन के बाद हुई मौत ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब अंतिम संस्कार के बाद परिजनों को अस्थियों के साथ राख में एक जली हुई सर्जिकल कैंची मिली। परिजनों का आरोप है कि भैरूंदा के सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने लापरवाही पूर्वक महिला के पेट में ही कैंची छोड़ दी थी, जिससे संक्रमण फैला और महिला ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
मृतका के परिजनों का कहना है कि नसबंदी के दौरान न केवल पेट में कैंची छोड़ी गई, बल्कि लापरवाही से आंत की नस भी कट गई थी। इसके कारण पूरे शरीर में जहर (सेप्टीसीमिया) फैल गया। हालत बिगड़ने पर महिला को अन्य अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने तीन मासूम बच्चों के सिर से मां का साया छीन लिया है, जिनमें सबसे छोटा बच्चा महज कुछ महीनों का है। श्मशान घाट से मिली इस कैंची की तस्वीर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जो सिस्टम की पोल खोल रही है।
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी लापरवाही के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी महिला डॉक्टर को सजा देने के बजाय उसका तबादला भैरूंदा से इच्छावर अस्पताल कर दिया। विभाग के इस कदम ने आग में घी डालने का काम किया है। स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश है। समाजसेवियों और महिला कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर ‘प्रशासनिक हत्या’ करार दिया है। परिजनों की मांग है कि आरोपी डॉक्टर का लाइसेंस तत्काल रद्द किया जाए, उस पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो और पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
फिलहाल, इस पूरे मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन राख से मिले इस ठोस साक्ष्य ने स्वास्थ्य विभाग के ‘ओटी (OT) प्रोटोकॉल’ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि ऑपरेशन के बाद उपकरणों की गिनती क्यों नहीं की गई? एसडीएम और बीएमओ ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई और न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं।













