Satyendra Jain : नई दिल्ली। आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन से जुड़ी कंपनियों की 7.44 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अटैच किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
Satyendra Jain : ईडी ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की 24 अगस्त 2017 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। सीबीआई ने सत्येंद्र जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। आरोप था कि मंत्री पद पर रहते हुए फरवरी 2015 से मई 2017 के बीच उन्होंने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।
Satyendra Jain : इससे पहले ईडी ने 31 मार्च 2022 को जैन की कंपनियों की 4.81 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की थी। बाद में 27 जुलाई 2022 को ईडी ने इस मामले में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (PC) दाखिल की थी, जिसे अदालत ने 29 जुलाई को स्वीकार किया।
Satyendra Jain : ईडी की जांच में सामने आया कि नोटबंदी के बाद नवंबर 2016 में सत्येंद्र जैन के करीबी अंकुश जैन और वैभव जैन ने 7.44 करोड़ रुपये नकद बैंक में जमा कराए थे। यह रकम आय घोषित करने की योजना (IDS) के तहत एडवांस टैक्स के रूप में जमा की गई थी। दोनों ने 2011 से 2016 के बीच चार कंपनियों—अकिंचन डेवलपर्स, पर्यस इन्फोसॉल्यूशंस, मंगलायतन प्रोजेक्ट्स और इंडो मेटल इम्पेक्स—के खातों में जमा 16.53 करोड़ की आय का लाभकारी स्वामित्व होने का दावा किया था, लेकिन जांच में सामने आया कि ये सभी कंपनियां असल में सत्येंद्र जैन के नियंत्रण में थीं।
Satyendra Jain : इस मामले में आयकर विभाग और दिल्ली हाई कोर्ट ने अंकुश जैन और वैभव जैन को सत्येंद्र जैन के लिए बेनामी संपत्ति धारक माना। सुप्रीम कोर्ट ने सत्येंद्र जैन की इस केस में दाखिल विशेष अनुमति याचिकाओं और पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया।
Satyendra Jain : अब तक ईडी ने इस केस में कुल 12.25 करोड़ रुपये की संपत्तियां (पहले 4.81 करोड़ और अब 7.44 करोड़) अटैच की हैं। एजेंसी ने बताया कि इस जानकारी को सीबीआई के साथ साझा किया गया है और सीबीआई ने इसके आधार पर पूरक चार्जशीट भी दाखिल की है।













