सर्वपितृ अमावस्या 2025 : साल 2025 की सर्वपितृ अमावस्या पितृ पूजा और पितृ दोष निवारण के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन शाम के समय घर, नदी किनारे या पवित्र स्थानों पर दीपक जलाना पितरों को शांतिपूर्वक विदाई देने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए शुभ माना जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या 2025 : दीपक जलाने के सर्वोत्तम स्थान और विधि
1. घर का आंगन या छत:
घर के आंगन या छत पर दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। दीपक को हमेशा दक्षिण दिशा की ओर रखें। इससे पितरों की ऊर्जा संतुलित होती है और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट होती है।
2. नदी, तालाब या जलाशय के किनारे:
पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना में दीपक प्रवाहित करना बेहद फलदायी होता है। जलाशय के किनारे दीपक जलाने से पितरों को मोक्ष मिलता है और पितृ दोष दूर होता है।
3. पीपल या बरगद के पेड़ के पास:
पीपल और बरगद के पेड़ पितरों का प्रतीक माने जाते हैं। इन स्थानों पर दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और पितृ दोष नष्ट होता है।
4. मंत्रों का उच्चारण:
दीपक जलाते समय मंत्र “ॐ पितृभ्यः शान्तिं भवतु” या “ॐ असुर्या पितृभ्यो नमः” का जाप करें। मंत्र का सही उच्चारण पूजा को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।
5. शुभ समय:
सूर्यास्त के बाद से शाम 7 बजे तक दीपक जलाना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस समय पितरों की विदाई के लिए सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है।













