Sahakar Global Controversy : सिंगरौली (मध्य प्रदेश): ऊर्जाधानी सिंगरौली में इन दिनों नदियों का सीना छलनी कर रेत निकालने का खेल धड़ल्ले से जारी है। जिले में रेत खनन का ठेका लेने वाली कंपनी ‘सहकार ग्लोबल’ पर नियमों को ताक पर रखकर उत्खनन करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की दर्जनों शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन और खनिज विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। आलम यह है कि नदियों का स्वरूप बिगड़ रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल ‘शून्य’ ही हाथ लग रहा है।
नदियों का अस्तित्व खतरे में, पर्यावरण संतुलन बिगड़ा स्थानीय लोगों का आरोप है कि सहकार ग्लोबल निर्धारित मापदंडों की अनदेखी कर मशीनों के जरिए नदियों की गहराई से रेत निकाल रही है। इससे न केवल जलस्तर नीचे जा रहा है, बल्कि जलीय पारिस्थितिकी तंत्र भी नष्ट हो रहा है। लीज एरिया से बाहर जाकर उत्खनन की खबरें भी आम हैं, लेकिन खनिज विभाग के अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
सड़कों पर ‘ओवरलोड’ का तांडव खनन के साथ-साथ परिवहन भी बड़ी समस्या बन गया है। रेत से लदे ओवरलोड डंपर और ट्रक ग्रामीण सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं। इन भारी वाहनों की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस और आरटीओ विभाग की आंखों के सामने से ये वाहन गुजरते हैं, फिर भी इन पर लगाम नहीं कसी जा रही।
फाइलों में कैद हुई शिकायतें, मिलीभगत की आशंका जिला कलेक्टर से लेकर भोपाल मुख्यालय तक कई बार लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती ने जनता के भरोसे को तोड़ दिया है। लोगों का आरोप है कि बड़ी कंपनी होने के कारण प्रशासन ‘नतमस्तक’ है और विभाग की इस निष्क्रियता के पीछे साठगांठ की बू आ रही है। आक्रोशित ग्रामीणों ने अब चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध उत्खनन और ओवरलोडिंग पर रोक नहीं लगी, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।











