RSS Shatabdi Varsh Jagdalpur : जगदलपुर (23 मार्च 2026)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत चतुर्थ चरण में बस्तर जिला स्तरीय ‘प्रमुखजन गोष्ठी’ का गरिमामय आयोजन कृषि महाविद्यालय, जगदलपुर के सभागार में संपन्न हुआ। इस बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख भरत भूषण ने शिरकत की, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने की। मंच पर प्रांत संघचालक टोपलाल वर्मा और जिला संघचालक योगेश्वर सिन्हा भी उपस्थित रहे।
धर्मांतरण पर बोले अरविंद नेताम: “केवल कानून काफी नहीं, समाज को जागना होगा”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अरविंद नेताम ने बस्तर और राज्य में हो रहे धर्मांतरण की वर्तमान स्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:
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सामाजिक सक्रियता: केवल सरकारी विधेयक या कानून बना देने से धर्मांतरण जैसी जटिल समस्या का समाधान संभव नहीं है।
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सामूहिक जिम्मेदारी: इस चुनौती से निपटने के लिए पूरे हिंदू समाज को एकजुट होकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी और अपनी सांस्कृतिक जड़ों की रक्षा करनी होगी।

बस्तर की धरती और राम का संबंध: भरत भूषण का संबोधन
मुख्य वक्ता भरत भूषण ने अबूझमाड़ और बस्तर के जनजाति परिवारों के बीच फैलाई जा रही भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने बस्तर के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:
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राम और शबरी: भगवान राम के चरण बस्तर की पावन धरा पर पड़े हैं। उन्होंने माता शबरी के जूठे बेर खाकर दुनिया को सामाजिक समरसता का सबसे श्रेष्ठ उदाहरण दिया था।
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भ्रम का निवारण: जनजाति समुदायों के बीच हिंदू जीवन शैली और परंपराओं को लेकर जो भ्रम पैदा किया जा रहा है, वह निराधार है। बस्तर की प्रकृति पूजा और हिंदू पूजा पद्धति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
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विरासत का संरक्षण: व्याख्यान में बस्तर की बदलती स्थितियों और भविष्य में यहां की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहरों को संजोने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

शंका समाधान और संवाद
गोष्ठी के समापन सत्र में उपस्थित प्रबुद्धजनों ने बस्तर के वर्तमान परिदृश्य और संघ के शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों को लेकर कई प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तार से उत्तर देकर शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षाविद और समाजसेवी उपस्थित रहे।











