[Nishaanebaz news] Rewa Cyber Fraud: रीवा। मध्यप्रदेश के रीवा में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस बार जालसाजों ने आम लोगों के बजाय स्वास्थ्य विभाग की ANM कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया। ठगों ने नायब तहसीलदार के नाम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जानकारी का इस्तेमाल कर महिला कर्मचारियों को विश्वास में लिया और फिर सरकारी बजट ट्रांसफर करने के नाम पर यूपीआई के जरिए उनके खातों से रकम निकाल ली।
जानकारी के मुताबिक, इस फर्जीवाड़े में दो ANM कार्यकर्ताओं से कुल 83 हजार रुपये की ठगी हुई है। वहीं 50 से ज्यादा अन्य ANM कार्यकर्ताओं को भी इसी तरह कॉल किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इनमें से कई महिलाएं समय रहते सतर्क हो गईं और ठगी का शिकार होने से बच गईं। मामला सामने आने के बाद बड़ी संख्या में ANM कार्यकर्ता एकजुट होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचीं और अधिकारियों से शिकायत की।
8 अगस्त को आया था फर्जी फोन
उप स्वास्थ्य केंद्र रगौली और बीड़ा में पदस्थ ANM कार्यकर्ताओं के मुताबिक, 8 अगस्त को उनके मोबाइल फोन पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को नायब तहसीलदार अशोक मीणा बताया। बातचीत के दौरान उसने स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम भी लिए।
ठगों ने सुपरवाइजर, मेडिकल ऑफिसर, CHO और ANM समेत स्टाफ के बारे में ऐसी जानकारी दी, जिससे महिला कर्मचारियों को लगा कि फोन वास्तव में किसी सरकारी अधिकारी की ओर से किया जा रहा है। इसी भरोसे का फायदा उठाकर जालसाजों ने उन्हें अपने जाल में फंसा लिया।
भवन मरम्मत के सरकारी बजट का दिया झांसा
Rewa Cyber Fraud: फर्जी अधिकारी ने ANM कार्यकर्ताओं से कहा कि स्वास्थ्य केंद्र के भवन की मरम्मत के लिए सरकारी बजट जारी हुआ है। इस राशि को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें यूपीआई के माध्यम से एक छोटी रकम भेजनी होगी।
इसके बाद ठगों ने फोन-पे पर 10 रुपये का मैसेज भेजा और महिला कर्मचारी से कहा कि वह यूपीआई पिन डालकर रकम वापस भेज दे। महिला ने जब 10 रुपये का ट्रांजेक्शन किया तो उसे लगा कि बताई गई प्रक्रिया पूरी हो रही है।लेकिन कुछ ही देर बाद उसके खाते से बड़ी रकम कट गई।
10 रुपये के बाद खाते से निकल गए हजारों रुपये
Rewa Cyber Fraud: पीड़ित ANM कार्यकर्ता के अनुसार, 10 रुपये के ट्रांजेक्शन के बाद उसके खाते से पहले 34,990 रुपये और फिर 17,990 रुपये कट गए। इस तरह उसके खाते से कुल करीब 53 हजार रुपये की रकम चली गई।
इसी तरह एक अन्य महिला कर्मचारी को भी जालसाजों ने अपने झांसे में लिया। उसके बैंक खाते से करीब 30 हजार रुपये निकाल लिए गए। इस तरह सामने आई जानकारी के अनुसार दोनों महिलाओं से कुल 83 हजार रुपये की ठगी हुई है।
50 से ज्यादा ANM को किया गया कॉल
Rewa Cyber Fraud: मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जालसाजों ने सिर्फ दो महिलाओं को ही निशाना नहीं बनाया। बताया जा रहा है कि 50 से ज्यादा ANM कार्यकर्ताओं को फोन किया गया था। सभी से अधिकारी के नाम पर इसी तरह की बातचीत कर सरकारी बजट और यूपीआई ट्रांजेक्शन का झांसा देने की कोशिश की गई।
हालांकि, कई ANM कार्यकर्ताओं को बातचीत संदिग्ध लगी। उन्होंने पैसे ट्रांसफर नहीं किए और दूसरे कर्मचारियों से संपर्क कर मामले की जानकारी ली। इसके बाद ठगी का पूरा मामला सामने आया।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर की शिकायत
ठगी की जानकारी सामने आने के बाद पीड़ित ANM कार्यकर्ताओं में हड़कंप मच गया। इसके बाद बड़ी संख्या में महिला स्वास्थ्य कर्मचारी एकजुट होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और मामले में कार्रवाई की मांग की।
पीड़ितों ने बताया कि जालसाजों के पास स्वास्थ्य केंद्र और वहां काम करने वाले कर्मचारियों से जुड़ी कई जानकारियां थीं। इसी वजह से शुरुआत में फोन करने वाले पर आसानी से शक नहीं हुआ।
साइबर ठगों के तरीके से उठे सवाल
Rewa Cyber Fraud: इस घटना ने सरकारी कर्मचारियों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जालसाज अब सिर्फ बैंक अधिकारी या रिश्तेदार बनकर ही ठगी नहीं कर रहे, बल्कि सरकारी अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों की पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ऐसे मामलों में किसी भी अधिकारी के फोन पर बिना सत्यापन के UPI PIN, OTP, बैंक संबंधी जानकारी या किसी तरह का ट्रांजेक्शन नहीं करना चाहिए। सरकारी बजट या विभागीय भुगतान के नाम पर फोन आने पर संबंधित कार्यालय से सीधे संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।
फिलहाल पीड़ित ANM कार्यकर्ताओं ने मामले की शिकायत कलेक्ट्रेट में की है। अब पुलिस और संबंधित विभाग की जांच में यह सामने आना बाकी है कि जालसाजों को स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की जानकारी कहां से मिली और इस साइबर ठगी के पीछे कितने लोग शामिल हैं।

